भारत में हाल ही में एक और सफ़ल हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई. और इस सर्जरी के साथ ही देश में हुई सफ़ल हार्ट ट्रांसप्लांट की संख्या में एक और नंबर जुड़ गया है.

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बीते शनिवार को ये सर्जरी हैदराबाद के जुबली हिल्स में स्थित अपोलो हॉस्पिटल में की गई. पूरा मामला ये है कि शनिवार को डॉक्टर्स ने ऑपेरशन थिएटर में एक 56 वर्षीय व्यक्ति जिसके दिल ने काम करना बंद कर दिया था को एक नई ज़िन्दगी दी. लेकिन ये ज़िन्दगी इस व्यक्ति को एक 17 वर्षीय डोनर की बदौतल मिली, जिसका दिल करीम नगर से लाया गया. इस 17 वर्षीय लड़के का नाम मेकल नवीन कुमार था, सूत्रों के मुताबिक़ बीते शुक्रवार को जगित्याल जिले के कोरुटला मंडल के चिन्न मेटपल्ली निवासी मेकल नवीन कुमार दुपहिया वाहन से गुजरते वक़्त आरटीसी बस के टक्कर मारने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया था जिसके बाद उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था.

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डॉक्टर्स की टीम का मानना था कि 56 वर्षीय इस व्यक्ति की जान केवल हार्ट ट्रांसप्लांट के ज़रिये ही बचाई जा सकती है. और जब डोनर का दिल हॉस्पिटल पहुंचा तब कार्डियोथोरेसिक सर्जन, ए. गोपाला कृष्णा गोखले ने तुरंत ही Radical Procedure करने का निर्णय लिया.

डॉक्टर गोखले ने बताया कि डोनर के दिल का साइज नॉर्मल फिट था, लेकिन लेने वाले व्यक्ति के दिल का साइज़ छोटी फुटबॉल के बराबर था. मतलब कि डोनर के दिल का साइज काफी छोटा था. वहीं मरीज के फेफड़े का ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर से ऊपर चार गुना बढ़ गया था. और अब डॉक्टर्स के पास समय बहुत कम था.

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स्थिति गंभीर होते देख डॉक्टर्स ने फैसला कि मरीज़ के दिल के साथ-साथ डोनर का दिल भी मरीज़ के अंदर फिट कर दिया जाय. इस प्रक्रिया को आम बोलचाल की भाषा में 'Piggyback Heart Transplant' कहा जाता है, और इसमें मरीज़ के दिल को हटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

डॉक्टर गोखले के अनुसार, अभी तक लगभग 150 ऐसी प्रक्रियाओं की गयीं हैं. किसी मृत व्यक्ति के शरीर स्वस्थ दिल मिलना आसान नहीं है. दिल मैच होने की संभावनाओं के साथ-साथ संभावित दाता को खोजने के बाद भी कई बार सफ़ल प्रत्यारोपण नहीं हो पाता है. डॉ. गोखले के अनुसार, मस्तिष्क-मृत व्यक्ति से दिल को बंद होने के चार घंटों के अंदर फिर से सक्रीय करना ज़रूरी होता है.

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बीते शनिवार की सुबह करीमनगर पुलिस ने नवीन कुमार के दिल को हैदराबाद पहुंचाने के लिए पूरा रास्ता खाली कराया, ताकि बिना किसी रुकावट के दिल को जल्दी से जल्दी हॉस्पिटल पहुंचाया जा सके. इसके लिए ट्रैफ़िक अधिकारी और अपोलो के डॉक्टर्स की एक टीम करीम नगर पहुंचे, जहां डोनर को ब्रेन-डेड घोषित किया गया था. और वहां से डोनर का दिल लेकर सुबह 6:50 पर निकले और Jubilee Hills स्थित अपोलो हॉस्पिटल मात्र 2 घंटे में यानि कि सुबह के ही 8.50 पर पहुंच गए.

इसके बाद डॉक्टर्स ने मरीज़ के दिल के कुछ हिस्से को निकाल दिया और उस जगह पर नया दिल लगाया. और अंत में करीब साथ घंटों की सर्जरी के बाद डोनर का दिल मरीज़ के लंग्स के बीच धड़कने लगा.

मगर ये एक चमत्कार ही है कि एक इंसान के शरीर में दो दिल धड़क रहे हैं. हालांकि, दोनों की हार्टबीत की दर अलग-अलग है पर दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. डॉ. गोखले के अभी तक के करियर में ये पहली और शायद आखिरी ऐसा ऑपरेशन है, जो उन्होंने किया है. "डॉ. गोखले ने कहा, 'अब मरीज़ के रक्त का दबाव सामान्य के करीब है और उसकी स्थिति स्थिर है. मगर हो सकता है कि आगे जाकर उसको कुछ तकलीफों का सामना करना पड़े. उनमें से एक जटिल ईसीजी पैटर्न है क्योंकि इस मरीज़ के शरीर में Pulses के दो सेट हैं, जिसके चलते ह्रदय सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं.

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मगर इस सफ़ल सर्जरी में करीम नगर पुलिस का अहम योगदान है. जिला पुलिस ने सड़क हादसे में घायल होने के बाद ब्रेन डेड हुए एक व्यक्ति के दिल को सड़क के रास्ते से केवल दो घंटे में हैदराबाद पहुंचा कर इस व्यक्ति की जान बचायी. करीमनगर पुलिस ने हैदराबाद व सिद्दपेट पुलिस की मदद से ग्रीन चैनल की व्यवस्था की. शनिवार सुबह 6.50 बजे विशेष वाहन से हृदय को लेकर निकला वाहल 8.50 बजे हैदराबद के अपोलो अस्पताल पहुंच गया. अपोलो अस्पताल ग्रुप के चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी ने हृदय को करीमनगर से हैदराबाद तक पहुंचाने में करीमनगर पुलिस आयुक्त कमलाहसन रेड्डी और ट्रैफिक इंस्पेक्टर की प्रशंसा की.

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