9वीं फ़ेल 10वीं करें और 11 वीं फ़ेल 12 वीं करें का बोर्ड हर गली-मौहल्ले और चौक-चौराहे पर देखने को मिल जाता है. कई बोर्ड्स तो घर बैठे ही बी.ए.-एलएलबी जैसी डिग्री देने का दावा तक करते हैं. दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही डिग्री देने वाले एक गिरोह का भांडा फोड़ा है, जो फ़र्ज़ी यूनिवर्सिटी और स्कूल बोर्ड के नाम से डिग्री दे कर कई लोगों को नौकरियां लगवा चुके थे.

पुलिस के मुताबिक, इस बाबत 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि इन लोगों के फ़र्ज़ी बोर्ड से हिंदुस्तान के करीब 300 स्कूलों को मान्यता प्राप्त थी. दिल्ली और लखनऊ से जालसाज़ी करने वाले इस गिरोह के ठिकानों से पुलिस को 17000 से ज़्यादा मार्कशीट, एडमिट कार्ड और कई यूनिवर्सिटीज़ के डॉक्यूमेंट्स बरामद हुए हैं.

पूर्वी क्षेत्र के जॉइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस रविंद्र यादव का कहना है कि 'इस गैंग से डिग्री ले कर कई लोग सरकारी और प्राइवेट नौकरियों पर लग चुके हैं, जबकि कई पासपोर्ट बनवा कर विदेशों में भी नौकरियां कर रहे हैं.'

पुलिस ऐसे लोगों की भी तलाश करके उन पर आपराधिक मामले के तहत केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है. हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, आरोपी ‘Board of Higher Secondary Education, Delhi’ के नाम से एक काल्पनिक बोर्ड चला रहा था. बोर्ड को वास्तविक दिखाने के लिए इसकी वेबसाइट भी बनाई थी, जिस पर दावा किया गया था कि बोर्ड को यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्सेज़ और नेशनल कॉउन्सिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग से मान्यता प्राप्त है.

HRD मिनिस्ट्री के एक अधिकारी का कहना है कि 'मंत्रालय के पास किसी स्कूल एजुकेशन बोर्ड को बनाने की शक्तियां ही नहीं है. इसे केवल राज्य सरकार ही बना सकती है, जिसके लिए विधान परिषद में इसका प्रस्ताव रखना पड़ता है.'

DCP यादव का कहना है कि 'इस बोर्ड के सदस्य छोटे शहर के लोगों को अपना निशाना बनाते थे, जिसके लिए ये अख़बारों में विज्ञापन भी दिया करते थे. स्कूल की डिग्री के लिए ग्राहक से 10,000 से लेकर 2 लाख रुपये वसूले जाते थे.' पुलिस ने इस बाबत शिव प्रसाद पांडे नाम के एक शख़्स को भी गिरफ़्तार किया है, जिसकी पहचान इस बोर्ड के चेयरमैन के रूप में हुई है. 65 वर्षीय शिव इस बोर्ड को अपने गैंग के साथ मिल कर 2011 से चला रहा था.

इस रैकेट का ख़ुलासा उस समय हुआ जब दिल्ली की ही रहने वाली एक महिला ने सितम्बर में विज्ञापन देख कर 10वीं की डिग्री के लिए इनसे सम्पर्क किया, जिसके लिए महिला से 5 हज़ार रुपये भी लिए गए. कुछ दिनों बाद बिना कोई एग्ज़ाम दिए महिला को डिग्री और उससे जुड़े कागज़ दे दिए गए, जिस पर महिला को शक हुआ और उसने पुलिस से सम्पर्क किया. इस बाबत शाहदरा की DCP नूपुर प्रसाद ने HRD मिनिस्ट्री से सम्पर्क किया, जहां से बोर्ड का भांडा फूट गया.

Source: HT