एक कहावत है कि किसी हारी-बिमारी में सगे-संबंधियों से पहले पड़ोसी ही आपकी मदद को आते हैं. पता नहीं किसने ये कहा है? पर जिसने भी कहा है बिलकुल सही कहा है. इसका ताजातरीन उदाहरण हाल ही में दिल्ली त्रिनगर इलाके में देखने को मिला, जहां मंगलवार रात को 50 वर्षीय सतबीर सांचाल अपने परिवार के साथ सो रहे थे कि एक तेज़ धमाके से उनकी नींद खुल गई.

सतबीर ने बाहर निकल कर देखा, तो पाया कि उनके पड़ोस के घर में सिलेंडर फटने से आग लग हुई है. सतबीर ने समय न गंवाते हुए मदद के लिए पहुंच गए और आग से परिवार के 8 सदस्यों की जान बचाई, पर सतबीर खुद बहुत जख़्मी हो गए और एक रियल हीरो की तरह मौत को गले लगा लिया.

सतबीर के बेटे अक्षय का कहना है कि 'हमारी Fire Extinguisher की दूकान है, जब हमने गुप्ता अंकल के घर आग देखी, तो पापा गोदाम से 4 Extinguisher ले कर आ गए.' दमकल कर्मियों को पहले ही कॉल की जा चुकी थी, पर वो भी लेट थे, जिसकी वजह से सतबीर और उनका बेटा ही आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे.

इसी दौरान 5वीं मंजिल पर एक धमाका हुआ, जिसमें खिड़की के कांच टूट कर सतबीर के गले में घुस गए. इमरजेंसी की हालत में जब तक सतबीर को हॉस्पिटल ले जाया जाता उनकी मौत हो गई.

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