दुनिया में ऐसे-ऐसे चमत्कार होते रहते हैं, जिनके बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है. कई बार हम अपने आस-पास किसी को ऐसी बीमारी से लड़ते देखते हैं, जिसके लिए हम यही मानते हैं कि उसका ठीक होना नामुमकिन है. लेकिन आज साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है, जो लाइलाज बीमारी को भी ठीक करने का दावा करती है. मगर यहां हम आपको किसी दुर्लभ बीमारी के बारे में नहीं, बल्कि ट्यूमर के बारे में बताने जा रहे हैं. वैसे तो ट्यूमर शरीर के जिस अंग में होता है उस अंग से उसको आसानी से निकाला जा सकता है. लेकिन अगर ट्यूमर लगभग 59 किलोग्राम (130lb) यानी कि 9 बड़े पत्थरों के बराबर का हो, तो मुश्किल की बात है.

जी हां, मिसिसिपी के गल्फपोर्ट में रहने वाले रॉजर लोगन के पेट में 9 पत्थरों के वज़न के बराबर का ट्यूमर था, लेकिन डॉक्टर्स द्वारा उनको बताया गया कि कोई बड़ी समस्या नहीं है, वो केवल थोड़े से मोटे हैं. जनवरी 31 को कैलिफोर्निया में स्थित Bakersfield Memorial Hospital में सर्जरी करके 57 वर्षीय रॉजर के शरीर से 58 किलो का कैंसरमुक्त एक ट्यूमर सफ़लता पूर्वक निकाला गया. वैसे तो रॉजर अब एकदम ठीक हैं, लेकिन अभी कुछ हफ़्तों तक उनको हॉस्पिटल में ही रहना होगा.

रॉजर के सर्जन डॉक्टर विपुल देव ने बताया कि ये ट्यूमर कई सालों पहले रॉजर के लोअर पेट में बनना शुरू हुआ था. धीरे-धीरे अन्दर ही अन्दर यह बढ़ता गया और इसमें इन्फेक्शन भी हो गया. इन्फेक्शन की वजह से पेट और उसके आस-पास की जगहों में सूजन होने लगी और इसमें खून का संचार भी होने लगा.

रॉजर ने Bakersfield के KERO-TV को बताया कि डॉक्टर्स ने उनको बताया था, तुम केवल मोटे हो, और तुम्हारे शरीर में केवल एक्स्ट्रा चर्बी है.'

आपको बता दें कि ये ट्यूमर इतना बड़ा हो गया था कि अगर रॉजर नीचे बैठते थे, तो वो नीचे लटकता था और ज़मीन से टच होता था.

इसके साथ ही रॉजर ने बताया, मैं इस ट्यूमर के वज़न को इस तरह मापता था, जैसे अगर आप अपने गले में एक स्ट्रैप बांध कर उस पर तीन बोरी सीमेंट लटका कर पूरे दिन रखें, जो भार आपको महसूस होगा, वही मैं इतने सालों से महसूस कर रहा था. वास्तव में मैं चलने-फिरने में पूरी तरह से असमर्थ था. मैं अपने घर के एक कमरे में लगातार झुके हुए ही समय बिताता था इतने सालों तक.'
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समय के साथ जब रॉजर का ट्यूमर 130-140lbs तक पहुंच गया, तब डॉक्टर्स ने उनको बताया कि इस स्थिति में इस ट्यूमर को ऑपरेट करके रिमूव करना बहुत ही जोखिम भरा है. इसके साथ ही सर्जरी करने के बाद भी उनके बचने के केवल 50 प्रतिशत ही आसार होंगे.

लेकिन रॉजर की पत्नी किटी ने देश और विदेश के विशेषज्ञों के बारे में पता किया और इस ऑपरेशन के बारे में बात की, तब कहीं जाकर उनकी मुलाक़ात डॉक्टर देव से हुई, जो पहले भी इस तरह की कई सर्जरीज़ कर चुके थे.

वो लगातार अपने पति को इस सर्जरी के लिए प्रोत्साहित करने लगीं और रॉजर का मनोबल बढ़ाती रहीं. वहीं रॉजर कहते हैं, 'मेरी पत्नी ने कभी भी मेरा साथ नहीं छोड़ा, बल्कि हमेशा मुझे हिम्मत ही दी.'

इसके बाद वो करीब 2000 मील दूर, 40 घंटों की यात्रा करके कैलिफोर्निया पहुंचे. यात्रा के दौरान रॉजर की चेयर को गाड़ी में बोल्ट की मदद से एक जगह पर फिक्स कर दिया गया था, जैसा की उनके घर में भी है.

आपको बता दें कि इतने सालों में रॉजर पिछले गुरुवार को पहली बार चलने में सफ़ल हुए.

रॉजर कहते हैं, 'अब मेरे पैर एक साथ हैं और मैं उनके बल पर खड़ा हो पा रहा हूं और अब मैं बेड पर लेट कर अपने पैर हिला-डुला सकता हूं.'

आपको बता दें कि रॉजर अपने घर जाने का इंतज़ार कर रहे हैं और अपनी ज़िन्दगी को फिर से बिना आर्मचेयर के शुरू कर पायेंगे.

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