भोजपुरी अभिनेता, गायक और सांसद मनोज तिवारी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें वह सार्वजनिक कार्यक्रम में एक शिक्षिका को बदतमीज़ी से डांटते नज़र आ रहे हैं. दरअसल, शिक्षिका का कसूर ये था कि उसने उनसे गाना गाने का अनुरोध कर दिया था.

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कुछ दिन पहले मनोज तिवारी अपने संसदीय क्षेत्र, यमुना विहार के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. मनोज तिवारी वहां मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित थे. यूं तो अकसर वो बिना किसी अनुरोध के भी गाना गाते दिख जाते हैं, पर इस बार वो शिक्षिका पर ऐसे बिगड़े की बेइज़्ज़्त कर उसे स्टेज से ही उतार दिया. वो माइक हटाए बिना ही मंच से उन्हें ज़लील करते रहे और उनके खिलाफ़ एक्शन लेने का आदेश तक दे डाला.

हमारी संस्कृति में गुरु को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया जाता है, पर वीडियो में आप शिक्षिका को लाचारी से सॉरी कहते हुए देख सकते हैं. रुआंसी होकर स्टेज से उतरती उस शिक्षिका को देखना बेहद दुखद है. महिलाओं का सम्मान करना, शिक्षक की इज्ज़त करना, क्या ये सब एक इंसान सांसद बनने के बाद भूल जाता है?

नोटबंदी के समय में महोदय तो गा-गाकर, लाइन में लगे लोगों का मज़ाक उड़ा रहे थे, तब भी इन्हें सांसद होने की गरिमा का ख़याल नहीं आया था. पर यहां वो शिक्षिका से पूछते दिख रहे हैं, "आपको पता नहीं है सांसद से कैसे बात करते हैं?" सांसद जी को तो जो करना था उन्होंने कर लिया, लेकिन इसकी वजह से उस शिक्षिका को शायद जीवन भर अपमानित होते रहना पड़े.

ऐसा करते हुए शायद सांसद जी भूल गए थे कि आज ये जहां हैं, जनता की वजह से हैं. जिन फैन्स ने यहां तक पहुंचाया है, उन्हीं का अनादर करना कोई गर्व की बात नहीं है. मनोज तिवारी अपने ऑफ़िशियल फ़ेसबुक पेज पर अपने नाम के आगे 'मृदुल' लिखते हैं. वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि मनोज तिवारी सांसद होने के घमंड में इतने चूर हो गए हैं कि इस शब्द का मतलब भी भूल गए हैं.

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एक अनुरोध का जवाब विनम्रता से भी दिया जा सकता है. ऐसा कर के वे अपना ही नहीं, अपनी पार्टी का भी नाम ख़राब कर रहे हैं. जनता जब किसी को मंच तक पहुंचा सकती है, तो उतार भी सकती है. इतिहास गवाह है कि घमंड में जनता का अपमान करने का नतीजा कई नेताओं को भुगतना पड़ा है. अगर आज देश में एक शिक्षक के साथ ये बर्ताव हो रहा है, तो ये अच्छे दिन तो बिलकुल नहीं हैं.

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