सोशल मीडिया के दौर में फ़ेसबुक हर आदमी की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. सोते-जागते दूर-दारज़ की ख़बरें जानने के लिए लोग फ़ेसबुक चेक करते रहते हैं. फ़ेसबुक लोगों पर इस तरह हावी हो चुका है, कि भले ही हम अपने Important काम करना भूल जाएं, पर फ़ेसबुक चेक करना नहीं भूलते.

बदलते वक़्त के साथ समय-समय पर फ़ेसबुक भी नए फ़ीचर लाता रहता है. फ़ेसबुक जब कुछ नया करता है, तो उसका क्रेज़ लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. कुछ टाइम पहले फ़ेसबुक ने Emoji फ़ीचर लॉन्च किया, फिर Live, दोनों ही फ़ीचर लोगों को बहुत पसंद आए.

कई हिट फ़ीचर देने के बाद फ़ेसबुक जल्द ही एक ऐसी तकनीक लाने की तैयारी में है, जिसके ज़रिए आपके मन में सोची हुई बात खु़द ब खु़द टाइप हो जाएगी. काफ़ी समय से Mark Zuckerberg माइंड रीडिंग प्रोजेक्ट पर काम रहे थे. इसे 'साइलेंट स्पीट इंटरफ़ेस' नाम दिया गया है.

Annual Developer Day के मौके पर, वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड हेड ऑफ़ सीक्रेटिव बिल्डिंग 8, रेजिना डुगन ने बताया ' भविष्य नई और बेहतर तकनीकों से भरा हुआ है, जो हमें बिना टाइप किए लोगों से संवाद करने में सक्षम बनाएगी. डुगन ने कंप्यूटर इंटरफ़ेस की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि इस इंटरफ़ेस पर फ़ेसबुक में 60 लोगों की एक टीम ह्यूमन ब्रेन द्वारा संचालित होने वाले इस सिस्टम पर काम कर रही है. ये सिस्टम 100 शब्द प्रति मिनट की स्पीड से टाइप कर सकता है मतलब हम फ़ोन में जिस स्पीड से टाइप करते हैं, ये सिस्टम उससे 5 गुना तेज़ टाइप करने में सक्षम होगा.'

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ये तकनीक उन लोगों की मदद करेगी, जो ठीक तरह से संवाद करने में सक्षम नहीं होते. मार्क ज़करबर्ग ने एक वीडियो के ज़रिए लोगों को इस तकनीक की एक झलक भी दिखाई.

इस टेक्नोलॉजी को भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है. अब इंतज़ार है उस दिन जब हकीकत में लोग इसका उपयोग कर पाएंगे.

Source : telegraph