भोपाल में 19 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप मामले में डॉक्टर्स की बड़ी लापरवाही सामने आई है. दरअसल, सुल्तानिया लेडी अस्पताल के डॉक्टर्स ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट जारी करते हुए, घटना को आपसी सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध करार दे दिया था.

इसके बाद मामले पर बढ़ते विवाद को देखते हुए अस्पताल ने पहली रिपोर्ट को ग़लत बताते हुए, नई रिपोर्ट पेश की है. एक ओर जहां पुलिस इसे 'लिपिक त्रुटि' बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर अस्पताल के डॉक्टर करण पीपरे ने घटनाक्रम पर अपनी सफ़ाई पेश करते हुए कहा, 'ग़लत रिपोर्ट जूनियर डॉक्टर द्वारा जारी की गई थी, जिसे अब संशोधित कर लिया गया है और नई रिपोर्ट भी पेश कर दी गई है.'
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रिपोर्ट में हुई इस बड़ी और शर्मनाक चूक के लिए दो डॉक्टर्स को नोटिस भी दिया गया है. घटना बीते 31 अक्टूबर की है. पीड़ित लड़की कोचिंग से अपने घर लौट रही थी, तभी हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास शराब के नशे में चूर 4 दंरिंदों की नज़र उस पर पड़ी और उन्होंने उसके साथ गैंगरेप किया. रेप पीड़िता के जख़्म, उस वक़्त और भी गहरे होते चले गए, जब उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस के आगे-पीछे भागना पड़ा.

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पुलिस की तरफ़ से हुई लापरावाही के बाद मामले को मीडिया में तूल पकड़ता देख, सत्ताधारी सरकार ने 3 थाना प्रभारी और 2 उप-निरीक्षकों को निलंबित करने का फ़रमान सुनाते हुए, मामले की जांच SIT को सौंप दी.

ख़बर है कि पीड़िता के पिता ख़ुद एक पुलिसकर्मी हैं और वो किसी दूसरे शहर में तैनात हैं. वहीं मामले पर कई सवाल खड़े होते हैं, जिनका जवाब आना अब तक बाकी है. पहला ये कि गैंगरेप पीड़िता की शिकायत दर्ज करने में 2 दिन की देरी क्यों हुई? इसके बाद अस्पताल की कोई जूनियर डॉक्टर ग़लत रिपोर्ट बना कर इसे सबके सामने पेश कर देती है और अस्पताल के किसी सीनियर डॉक्टर ने क्रॉस चेक करना भी उचित नहीं समझा आख़िर क्यों?

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