बीमारी को लेकर ज़्यादातर लोगों का नज़रिया एक सा ही रहता है. किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को सबकी Sympathy तो मिल जाती है, लेकिन प्यार नहीं. लम्बी बीमारी से ठीक हुए या जूझ रहे, कई लोगों को इस प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है. उनके साथ ज़िन्दगी बिताने के लिए लोग तैयार नहीं रहते, क्योंकि उनके मन में कहीं न कहीं ये धारणा होती है कि इनकी तबियत ठीक नहीं रहेगी.

Source: Independent

सवाल ये है कि क्या इन लोगों को खुशियों का हक़ नहीं?

क्या इन लोगों को किसी बीमारी की वजह से अपनी इच्छाएं रोक लेनी चाहिए?

ऐसे ही लोगों के लिए बनी है एक ख़ास Matrimonial साइट, Divine Relations. इस साइट का मकसद ऐसे दो ख़ास लोगों को मिलाना है, जो इस तरह से प्रॉब्लम से गुज़र चुके हैं या फ़ेस कर रहे हैं. पिछले साल नवम्बर में शुरू हुई इस साइट पर अभी तक 51 लोग रजिस्टर कर चुके हैं.

मुंबई की रहने वाली चैताली मनकामे को किडनी की समस्या है और उन्हें समय-समय पर Dialysis के लिए जाना पड़ता है. घरवालों के फ़ोर्स करने पर उन्होंने एक Matrimonial साइट में ख़ुद को रजिस्टर भी किया, लेकिन उन्हें अभी तक कोई अच्छा प्रस्ताव नहीं मिला. उन्होंने अपने बायो में अपनी बीमारी के बारे में साफ़ लिखा है, क्योंकि वो किसी को अंधेरे में रख कर किसी रिश्ते की शुरुआत नहीं करना चाहती.

चैताली कहती है कि लोगों को अपनी होने वाली बीवी से काफ़ी आशाएं रहती हैं और मैं उनकी परफ़ेक्ट वाइफ़ की छवि में फ़िट नहीं बैठती. दुनिया मुझे, सिर्फ़ मेरी कमियों से जज करती है. इस वक़्त चैताली की मदद के लिए आगे आयी है Divine Relations वेबसाइट, जो उसकी पसंद के इंसान से मिलवाने की पूरी कोशिश में है.

चैताली की तरह ही, मुंबई के मलाड में रहने वाले केतन कोठरी का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, लेकिन इसके बाद वो पूरी तरह से ठीक हो गए. वो वापस जॉब भी करने लगे. उनकी ज़िन्दगी में सब कुछ नार्मल है, सिवाय उनकी पर्सनल लाइफ़ के. लोग उन्हें पसंद तो करते हैं, पर पार्टनर के रूप में देखने से पहले उनकी ठीक हो चुकी बीमारी को देखते हैं.

इन्हें भी Divine Relations एक सच्चे साथी से मिलवाने की कोशिश में है.

इसे शुरू करने वाले विवेक शर्मा ख़ुद अपने 4 साल के बेटे को खो चुके हैं और वेबसाइट की शुरुआत भी उन्होंने उसके जन्मदिन के दिन की थी. विवेक कहते हैं कि अगर दो ख़ास लोग एक-दूसरे से मिल जाएं, तो उनसे बेहतर उन दोनों को कोई नहीं समझ सकता. उन्होंने एक बहुत ज़रूरी बात भी कही कि कई डॉक्टर भी ये मानते हैं कि भले ही पेशेंट पूरी तरह से ठीक हो जाए, तब भी उसकी बीमारी से जुड़ा स्टिग्मा नहीं हटता.

उनकी कोशिश ऐसे दो लोगों को मिलाने की है. अगर आप अपने लिए या किसी जानने वाले के लिए इस वेबसाइट पर रजिस्टर करने के बारे में और जानना चाहते हैं, तो:

वेबसाइट पर जा कर अपनी हेल्थ या किसी बीमारी से जुड़ी जानकारी शेयर करें, अपना ब्लड ग्रुप बताएं. अपना टिश्यू टाइप, PRA (परसेंट रिएक्टिव), सीरम क्रॉस मैच भी ज़रूर बताएं. रजिस्टर होने के बाद वेबसाइट आपकी दी हुई जानकारी को क्रॉस-चेक करेगी और उसके बाद ही आपको मेंबर बनाएगी. 

Feature Image Source: Better India