दुनिया आज एक काले साए से घिरती जा रही है और इस साए ने निशाना बनाया है युवाओं को. किसी भी देश का भविष्य तय करने वाली युवा पीढ़ी का खुद का भविष्य अंधकार में दिख रहा है. कारण है ड्रग्स. युवा थोड़ी देर के नशे की खुशी के चक्कर में आने वाले वक़्त को पूरी तरह से ख़त्म कर रहे हैं. भारत भी इससे अछूता नहीं. इन्हीं आदतों की वजह से भारत के कई राज्य धीर-धीरे पिछड़ते जा रहे हैं. हाल ही में आई फ़िल्म 'उड़ता पंजाब' ने पंजाब के हालात को बड़ी खूबी से बयां किया.

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लेकिन सिर्फ़ एक राज्य नहीं, बल्कि कई राज्य हैं जो नशे और ड्रग्स के अंधकार से घिरते जा रहे हैं. कुछ ऐसे ही हालात हैं मेघालय के. भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से का ये राज्य काफ़ी खूबसूरत है. प्रकृति की कई धरोहरें इस राज्य में हैं. लेकिन वहां के युवा नशे की लत से घिरते जा रहे हैं.

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बीते 10 सालों में इस राज्य के युवा नशे और ड्रग्स की लत में बड़ी तेजी से पड़े हैं. एक रिसर्च के मुताबिक इन आंकड़ो में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए Anti-Narcotics Cell ने एक बेहतरीन उपाए निकाला है.

इसके लिए उन्होंने इसकी जड़ को साफ़ करने की सोची है. छोटे बच्चों को खेल के प्रति जागरूक करना इसमें सबसे पहला कदम है. बच्चों को ड्रग्स की लत लगने से पहले ही वो उन्हें खेल की लत लगा रहे हैं. खेल की लत के आगे ड्रग्स की लत बच्चों तक नहीं पहुंच पाएगी. Anti-Narcotics Cell के अधिकारियों के मुताबिक ड्रग्स की सप्लाई पर लगाम लगाना मुश्किल है, लेकिन इसकी डिमांड पर ही लगाम लगा दी जाए, तो बहुत सारी मुसीबतें ख़त्म हो जाएंगी.

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काफ़ी कम वक़्त में ही खेल ने कई बच्चों को न सिर्फ़ जोड़ा है, बल्कि कई ऐसे बच्चे भी खेलों के प्रति जागरूक हुए हैं, जो ड्रग्स के दलदल में फंसे हुए थे. इससे मेघालय में क्राइम भी कम हुआ है.

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ये एक बेहतरीन कदम है. ऐसे ही कैंम्पेन पूरे देश में चलाने की ज़रूरत है. अगर हम डिमांड को ही खत्म कर देंगे, तो खुद-ब-खुद सप्लाई को रोका जा सकता है.