आजकल मैट्रीमोनी एड यानी शादी के लिए दिए जाने वाले इश्तहारों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. ये ख़ास तौर पर पश्चिम बंगाल में देखा जा रहा है. कई लोग एड में लिखने लगे हैं कि उन्हें ऐसी लड़की चाहिए जिसे फ़ेसबुक की लत न हो. सोशल मीडिया की एडिक्ट हो चुकी लड़कियों को रिजेक्ट कर दिया जा रहा है.

मसलन ये एड देखिये:

'हमारा लड़का एक सरकारी नौकर है, उसे अपने साथी से कुछ ही चीज़ें चाहिये. उसकी उम्र 18 से 22 के बीच होनी चाहिए. बारहवीं तक पढ़ाई बहुत है, लेकिन बस लड़की को फ़ेसबुक और Whatsapp की लत न हो.'

बंगाल के विज्ञापन विशेषज्ञ कहते हैं कि आजकल अलग-अलग तरह के एड आने लगे हैं. इन इश्तहारों के पीछे ये मानसिकता छुपी होती है कि सोशल मीडिया पर लगी रहने वाली लड़कियां आगे जाकर विवाहेत्तर संबंधों में पड़ सकती हैं और शादीशुदा ज़िन्दगी में परेशानियां आ सकती हैं.

अब सवाल ये उठता है कि क्या सोशल मीडिया की लत नशे की लत से भी बुरी है, जो लोग एड में इसके बारे में लिखना ज़्यादा ज़रूरी समझते हैं.

वैसे ये तथ्य है कि भारत में ही लोग सबसे ज़्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.

सर्वे ये भी बताते हैं कि सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करने से डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियां बढ़ सकती हैं. इस तरह के एड देने के पीछे कारण ये भी होता है कि कई लोग अपनी ज़िन्दगी को दुनिया से बांटना ज़रूरी नहीं समझते.

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