देहज प्रथा ने देश को किस कदर जकड़ रखा है, इसका पता बिहार की तरफ़ एक नज़र भर फेर लेने से पड़ जाएगा. बिहार की हालत कुछ यूं बयां करें कि इस राज्य में शादी के लिए लड़के खरीदे जाते हैं. बाकायदा यहां नौकरियों के हिसाब से लड़कों के रेट भी तय हैं.

सुन कर थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये बिलकुल सही है. इतना ही नहीं, नोटबंदी के बाद पैसों की तंगी में इसमें किश्तों का भी चलन देखा गया था. नोटबंदी के बाद भी देहज प्रथा में करीब 25 फ़िसदी बढ़ोतरी हुई है.

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लड़कों का रेट कार्ड भी बना हुआ है. इस रेट का आधार है लड़कों की जॉब. अगर कोई लड़का IAS है, तो उसकी कीमत मुंह मांगी होगी. वहीं अगर बैंक का पी.ओ. है, तो उसे 30 लाख रुपये कैश आराम से मिल जाएंगे.

पिछले साल तक बैंक में काम करे वाले लड़कों का रेट 10 लाख रुपये था. इस साल इस पूरी रेट लिस्ट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है.

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दो साल पहले तक IAS लड़कों की कीमत आठ से दस करोड़ रुपये तक थी. ऐसा नहीं है कि हर बार लड़के वालों की तरफ़ से इस डिमांड को रखा जाता है, कई बार खुद लड़की वाले भी लड़कों की कीमत लगा लेते हैं.

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ऐसे में कैसे इस प्रथा को हम खत्म करने की सोच सकते हैं, जब समस्या की पूरी जड़ इस कदर हमारे समाज का हिस्सा बन गई हो. जागरूकता सिर्फ़ कागज़ों पर नज़र आती है. असल में ये पूरी खोखली व्यवस्था है, जिसके अधीन सिर्फ़ बिहार नहीं, बल्कि हमारा पूरा देश है.