हमारे देश में दिव्यांगों के लिए Conditions उतने अच्छे नहीं हैं, जितने होने चाहिए. Conditions से यहां मतलब उनके लिए सुविधाएं, अवसर और प्रोत्साहन से है. दुख की बात है कि क़ाबिलियत होने के बावजूद दिव्यांगों को समान अवसर नहीं दिया जाता. जहां समान अवसर दिया भी जाता है, वहां भी लोग उन्हें 'बेचारगी' की नज़रों से देखते हैं.

कुछ दिनों पहले विराली मोदी ने भारतीय रेल में दिव्यांगों को होनी वाली समस्याओं पर प्रधानमंत्री, रेल मंत्री आदि को एक Petition भेजकर is par kade kadam uthaane ki appeal ki thi. विराली ने बताया था कि किस तरह Wheelchair पर होने के कारण उनको कई परेशानी उठानी पड़ी और कैसे उनकी मदद नहीं की गई.

Source- India Times

विराली की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे, आख़िरकार सरकार को झुकना पड़ा और रेलवे ने दिव्यांगों को ध्यान में रखते हुए कुछ बदलाव किए. कुछ ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश के टिकमगढ़ ज़िले की देशना जैन की. जन्म से ही सुनने और बोलने में अक्षम देशना ने इसे कमज़ोरी नहीं समझा और आज वो Miss India Deaf 2018 का ख़िताब जीत कर अपने लिए ख़ास जगह बना चुकी है.

दिव्यांगों को सहारे से ज़्यादा प्रोत्साहन और भरोसे की ज़रूरत होती है. देशना पर भी ऐसा ही भरोसा दिखाया उसके माता-पिता ने.

देशना जैन की बहन काव्या जैन ने ग़ज़बपोस्ट से हुई बातचीत में बताया,

24 फरवरी से 26 फरवरी के बीच All India Deaf Arts and Culture Society ने जयपुर में तीन दिन की Miss India Deaf प्रतियोगिता आयोजित की.

All India Deaf Arts and Culture Society द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में अलग-अलग राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था. ये सोसाइटी किसी एक फ़ाइनलिस्ट को विजेता घोषित नहीं करती और आख़िरी दौर तक तीन प्रतिभागी चुनती है, जिसमें देशना जैन, वर्षा डोंगरे और निष्ठा डुडेजा Finalists रहीं.

Miss India Deaf का ख़िताब जीतने के लिए देशना ने तीन राउंड पार किए. पहले राउंड में लहंगा पहनकर रैम्प वॉक किया, दूसरे राउंड में वेस्टर्न पहनकर रैम्प वॉक और तीसरे राउंड में सवालों के जवाब देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया.

काव्या ने आगे बताया कि Finalists को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भेजा जाता है. देशना, Mr & Miss Deaf International प्रतियोगिता में भारत की तरफ़ से हिस्सा लेंगी. इस साल ये प्रतियोगिता ताइवान में 8-16 जुलाई के बीच आयोजित की जाएगी.

20 साल की देशना, 3 साल की उम्र से ही माता-पिता से दूर रहने लगी थी. उसने भोपाल के एक मूक-बधिर स्कूल, आशा निकेतन से पढ़ाई की. इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए वो इंदौर चली गई. बचपन से ही कुछ कर गुज़रने का जज़्बा रखने वाली देशना इससे पहले मिस मध्य प्रदेश का ख़िताब भी जीत चुकी है. देशना को Sketching करना पसंद है और उसने स्टटे लेवल पर नृत्य प्रतियोगितायें भी जीती हैं. देशना एक Marathon Runner भी है.

देशना की तस्वीरों से सिर्फ़ एक बात ही झलकती है... आत्मविश्वास...आत्मविश्वास...और आत्मविश्वास.

हमारे समाज में दिव्यांगों को वो हक़ नहीं मिलता जो आम नागरिकों को मिलता है. Talent होने के बावजूद समान अवसरों से वंचित रहने के कारण दृढ़ इच्छाशक्ति के बावजूद दिव्यांग कुछ कर नहीं पाते. कई बार तो माता-पिता ही बच्चों का साथ नहीं देते. ऐसे में देशना जैन न सिर्फ़ दिव्यांगों के लिए, बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा है.

देशना की कहानी हर किसी तक पहुंचनी चाहिए. ख़ास कर उन लोगों तक जो ये सोचते हैं कि दिव्यांग कुछ कर नहीं सकते या फिर उन्हें ताउम्र सहारे की ज़रूरत होती है.

अगर आप देशना को सपनों की उड़ान भरने में कोई भी सहायता करना चाहते हैं, तो इस नंबर (7838316707) पर काव्या जैन से संपर्क कर सकते हैं.