Me Too आंदोलन में जिन बड़े नामों के ऊपर आरोप लगे हैं, उनमें से एक एम.जे. अकबर भी हैं. Asian Age चलाने वाले एम.जे. अकबर पत्रकार से राजनेता बने कुछ लोगों में से एक हैं. अकबर के ऊपर प्रिया रमणी सहित 15 पत्रकारों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था.

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अकबर ने इन आरोपों को न सिर्फ़ नकारा है बल्कि 97 वकीलों की ऐसी टीम खड़ी कर दी है जो प्रिया रमानी केस के इकलौते वकील से लड़ेगी। अकबर वो पहले राजनेता हैं, जिनके ऊपर Me Too आंदोलन के तहत आरोप लगे हैं.

ये मामला इतनी सुर्ख़ियां क्यों बटोर रहा है?

इतने वकीलों की ये फ़ौज एम.जे.अकबर की शक्ति का भी प्रदर्शन भी कर रही हैं. वर्तमान में अकबर विदेशी मामलों के केंद्रिय राज्य मंत्री हैं. उनके समर्थन में एक और बात जाती है और वो ये कि जितनी भी महिला पत्रकारों ने उन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है, उनमें से किसी ने भी एफ़.आई.आर नहीं लिखवाई है.

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ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अकबर ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में रमानी के ख़िलाफ़ अपने वकील Karanjawala & Co. के ज़रिये मानहानी का केस दायर किया है. 41 पन्नों के शिकायत पत्र में रमानी द्वारा छापी गयी स्टोरी और सोशल मीडिया पर लिखे गए उनके कमेंट्स भी संलग्न थे. केस भारतीय दंड संहिता के अनुछेद 499 और 500 के तहत किया गया है.

शिकायत पत्र में अकबर ने लिखा है कि रमानी ने 'जानबूझकर, इरादे से, विचारपूर्वक और दूर्भावनापूर्वक तरीके' से अपनी 'पूरी तरह से झूठी, तुच्छ, अनुचित और संदेहास्पद' कहानी के ज़रिये उन्हें बदनाम किया है.

अकबर की याचिका में रमानी की स्टोरी के कुछ हिस्सों को भी Quote किया गया है. जिसमें एक जगह पर रमानी ने ख़ुद लिखा है कि अकबर ने उनके साथ कुछ नहीं किया है.

केस दायर करने के कुछ घंटों बाद रमानी ने भी कहा कि वो भी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'सच और पूर्णत: सच ही मेरा बचाव है. अकबर उन सभी महिलाओं को डरा-धमका कर चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रही हैं.'

सिर्फ़ रमानी ही नहीं, अकबर के साथ काम कर चुकी दर्जन भर महिला पत्रकारों ने उन पर शोषण और बद्तमीज़ी का आरोप लगाया है. अकबर ने सभी आरोपों को 'बकवास, ग़लत और आधारहीन' बताया.