भारत का हर इंसान देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी से ढेरों आशाएं रखता है. PM मोदी ने भी भारत की जनता की आशाओं पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास किये हैं. देश का हर नागरिक चाहता है कि वो विकास के मुद्दे पर, देश में बढ़ती बेरोज़गारी पर और विश्व में भारत की सही पहचान स्थापित करने की बात करें. PM मोदी ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर खुल कर बात की है.

हालांकि एक नागरिक के तौर पर हम ये भी आशा करते हैं कि देश में 'राष्ट्रधर्म' और 'गौ रक्षा' के नाम पर फैल रही अराजकता, हत्या और किसी के धर्म के प्रति नकारात्मक भावना पर PM मोदी का Stand बहुत ज़रूरी है. अभी तक इन ज्वलंत मुद्दों पर PM मोदी ने चुप्पी साध राखी थी. न ही उन्होंने कोई बयान दिया था, न ही कोई ट्वीट. और इस बात से इनकार करना ग़लत होगा क्योंकि उनकी इस चुप्पी ग़लत सन्देश जा रहा था, ख़ास कर उन लोगों को, जो धर्म, जाति के नाम पर अराजकता फैलाने में आगे थे.

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हाल ही में भीड़ ने ईद के लिए ख़रीदारी कर ट्रेन से वापस जा रहे एक 16 साल के मासूम की निर्मम हत्या कर दी, क्योंकि 'उन्हें कहा गया कि वो गाय का मांस खाता है'. Mob Lynching के इस एक और केस के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश भर में भीड़ की अराजकता के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट किये गए, NotInMyName.

Source: Inquisitr

हमें लगा था कि विवादों को अपने भाषण या ट्वीट में न शामिल करने वाले प्रधानमन्त्री इस बार भी चुप रहेंगे. लेकिन इस बार वो बोले:

प्रधानमंत्री ने इस प्रोटेस्ट के ठीक एक दिन बाद ट्वीट किया और अपने भाषण में कुछ बातें कहीं:

गौभक्ति के नाम पर लोगों को मारना सही नहीं है. महात्मा गांधी भी इस बात को सही नहीं मानते.

इस देश में किसी भी नागरिक को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.

हिंसा से कभी कोई मसला हल नहीं हुआ है.

हम बापू की धरती के लोग हैं, हम अहिंसावादी लोग हैं. हम ये क्यों भूल जाते हैं.

ये सभी बातें PM मोदी ने साबरमती आश्रम के 100 साल की वर्षगांठ पर कहीं. इस वक़्त देश में गौर रक्षा, राष्ट्रवाद के नाम पर जो भी हो रहा है, वो सिर्फ़ ग़लत ही नहीं, परेशान करने वाला है. जो देश कभी गंगा-जमुनी तहज़ीब पर इठलाता था, आज वही देश Communal Violence की लपटों में जल रहा है. इस वक़्त एक ट्वीट से ज़्यादा मज़बूत निर्णय की ज़रूरत है.