बीते कुछ दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों से दुखद समाचार ही मिल रहे थे. लेकिन कहते हैं न अंधेरे के बाद उजाला निश्चित है. केरल से आई है एक ऐसी ही ख़बर, जो काले अंधेरे मे उम्मीद की किरण से कम नहीं.

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जहां देश के कई लोग आज जाति और धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, वहीं केरल के छात्रों ने हम सब के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है.

केरल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9000 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के दौरान, 1.24 लाख छात्रों ने एडमिशन फ़ॉर्म में जाति और धर्म के कॉलम में किसी भी ऑपशन पर निशान नहीं लगाये.

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बुधवार को स्टेट एसेंब्ली में Question Hour के दौरान Vamanapuram के सीपीएम एमएलए, डी.के.मुरली ने सवाल किया कि, 'कितने छात्रों ने एडमिशन के वक़्त जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ा है?'

इस प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री सी. रवीन्द्रनाथ ने बताया कि 1-10 क्लास में पढ़ने वाले 1,23,630 छात्रों ने ये कहा कि वे किसी भी धर्म या जाति से नहीं हैं. वहीं 11वीं से 278 और 12वीं से 239 छात्रों ने धर्म और जाति के कॉलम में कुछ नहीं भरा.

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ज़िले या क्षेत्र के आधार पर आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. शिक्षा मंत्री ने भी इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

ये छात्र पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं. इन छात्रों में हर वर्ग, हर जाति, हर धर्म के छात्र होंगे. लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर कुछ कर दिखाने का रास्ता चुना, न कि जाति या धर्म के नाम पर मिलने वाले आरक्षण को.

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