विश्व में ऐसे कई सीरियल किलर्स हुए हैं, जिनके बारे में पढ़ते ही रूह कांप उठती है. इस तरह के शख़्स दिमागी रूप से थोड़े अलग होते हैं, ये बेहद ही गुस्सैल और क्रूर होते हैं. हां, आप ये कह सकते हैं कि 'इनके सीने में दिल और भावनाएं नाम की चीज़ नहीं होती'. कुछ किलर्स तो लोगों को महज इसलिए मार देते हैं, क्योंकि उन्हें इस काम में मज़ा आता है. हालांकि, इतिहास में ऐसे कई धार्मिक नेता भी हुए हैं, जिन्होंने अपने फायदे के लिए लोगों को मरवा दिया. इनका चेहरा भले ही राक्षस जैसा ना दिखता हो, लेकिन वे अंदर से राक्षस ही थे. मैं यहां आपको दुनिया के उन धार्मिक नेताओं के बारे में बताने जा रहा हूं, जिन्होंने इंसानों को मौत के घाट उतारने में किसी प्रकार की कसर नहीं छोड़ी. ये लोग इंसानों को मरवाने या फिर उनकी हत्या करने में ज़्यादा संकोच नहीं करते थे. बस अपना फायदा और मज़ा देखते हुए उन्हें बेरहम तरीके से मौत के घाट उतार देते थे.

1. हॉन्ग सिऊकुआं

अपने दौर में हॉन्ग 20 मिलियन लोगों की मौत की वजह था. ये संख्या बताती है कि होंग खूनी मंजर फैलाने वाला सबसे क्रूर और खतरनाक नेता था. इसका ताल्लुक एक किसान परिवार से था और वो पेशे से स्कूल टीचर था. पर नौकरशाही की परीक्षा ना पास कर पाने के चलते परेशान हो गया और बाद में अपना दर्शन स्थापित किया. अपने दर्शन के ज़रिये वो कहता था कि वो जीज़स का छोटा भाई और भगवान का बेटा है. अपने इस दर्शन से लोगों को आकर्षित किया और स्थानीय मंदिरों में तोड़-फोड़ शुरू की. इस सब के बावजूद भी एक साल के भीतर ही होंग के अनुयायियों की संख्या 30 हजार पहुंच गई. जिन्होंने Taiping Heavenly Kingdom स्थापित करने के लिए विद्रोह छेड़ दिया. लेकिन 15 साल बाद जब Imperial Chinese Forcesसे हार गया, तो उसने ज़हर पीकर अपनी जान दे दी. लेकिन इस पूरे युद्ध में कई लोग मारे गए, जिसका जिम्मेदार केवल यही शख़्स था.

2. मोहम्मद अहमद

अहमद को 'Mahdi' के नाम से भी पहचाना जाता है, इस व्यक्ति ने अपने काल में करीबन सौ से हज़ार लोगों को मारा. इस्लाम का 'महदी' नाम क्रिश्चेनियटी और Judaism के मसीहा से मिलता-जुलता शब्द है. यह इस्लामिक कानून के आधार पर दुनिया पर राज करना चाहता था. इसकी गलती में साथ देने वाले अनुयायियों को बेफिजुल की लड़ाइयों में केवल मौत ही मिली थी.

3. हसन अल-सबह

हसन अल-सबह ने "Hashshashin" नाम के पंथ की स्थापना की थी, जिसे वो पहाड़ पर स्थित अपने किले से चलाता था. जो भी इसके पंथ को मानने से इंकार करता और उसके पीछे इस्लामिक कारण गिनवाता, तो वह ह्त्यारों की मदद से उन्हें मौत के घाट उतरवा देता था. हसन एक सफल नेता था, जो 'ओल्ड मैन ऑफ़ द माउंटेन' के नाम से भी प्रसिद्ध था. पर जब इस शख़्स ने मंगोल खान को मरवाने की कोशिश की, जो नाकाम रही, तो इसके बाद मंगोलियों ने पहाड़ स्थित उसके किले पर ही जाकर सभी को मौत के घाट उतार दिया. इस खून-खराबे में हज़ारों लोग मारे गए थे.

4. क्रेडोनिऐ म्वेरिंदे

हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत की जिम्मेदार क्रेडोनिए युगांडा की एक पूर्व वेश्या थी, जिसने "Movement for the Restoration of the Ten Commandments of God" की खोज की. इसके बाद उसके कई अनुयायी बनते चले गए. बाद में कुछ घटनाएं ऐसी घटीं कि ये इन सभी अनुयायी क्रेडोनिये से अपने पैसे मांगने लगे. उसने सभी अनुयायियों को पैसा देने के लिए चर्च में बुलाया और उन सभी को बिल्डिंग में ही बंद कर के आग लगा दी. इसमें मरने वाले लोगों की संख्या 738 थी. लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की जांच की, तो उन्होंने कंपाउंड से लगभग 100 शव और बरामद किए.

5. जिम जोंस

जिम जोंस The People of Temple का लीडर था, ये शख़्स 923 लोगों की मौत का ज़िम्मेदार है. अमेरिका के लिए 9/11 से पहले ये त्रासदी सबसे बड़ी थी. इस शख़्स का कहना था कि 'वो धर्म का इस्तेमाल एक नए तरह की मार्क्सिस्ट सोसाइटी प्रमोट करने के लिए कोशिश कर रहा है'. जितनी जल्दी इस संप्रदाय के अनुयायी बढ़ रहे थे, उसी तरह इस पंथ पर मुश्किलें भी बढ़ने लगीं. इसलिए जॉन्स ने अपने अनुयायियों से कहा कि 'हमें अमेरिकी फोर्स को वयस्कों की हत्या करने और बच्चों का ब्रेनवॉश करने से रोकने के लिए क्रांतिकारी रूप से आत्महत्या करनी होगी'. चर्च के सभी सदस्यों को जहर पिलाया गया. जॉन्स ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली. पूरे पंथ के 909 लोग मारे गए, जिनमें बच्चों की संख्या 304 थी.

6. मोसेस ऑफ़ क्रीट

यह तस्वीर वास्तविक तौर पर मोसेस की है, 'मोसेस ऑफ क्रीट' की नहीं है, क्योंकि इनकी तस्वीर है ही नहीं. यह व्यक्ति 5वीं शताब्दी में एक यहूदी अध्यापक था. ये उस वक्त की बात है, जब यहूदियों को ज़बरदस्ती उनकी ज़मीन से बेदखल किया जा रहा था. उसी दौरान इस शख़्स ने खुद को मसीहा बताया, जिसके चलते कई लोग इसके अनुयायी बन गए. उसने अपने अनुयायियों से कहा कि भगवान ने यहूदी राज्य को दोबारा रचने के लिए मुझे चुना है. उसने कहा कि वो उन्हें उनकी ज़मीन वापस दिलवाएगा, जिसके बाद अनुयायियों ने अपनी संपदा को बेच दिया और निकल पड़े मोसेस के पीछे-पीछे. आगे जाकर मोसेस ने अनुयायियों से कहा, 'मुझ पर भरोसा करते हो, तो समुद्र में छलांग लगा दो'. लोगों ने छलांग दी.

7. डेविड कोरेश

डेविड कोरेश को कई पाठक याद रखेंगे, वैसे आपको बता दूं इस शख़्स ने किसी प्रकार के पंथ की नीव नहीं रखी थी. सरकार विरोधी Branch Davidian का हिस्सा बन गया था. इस पंथ के संस्थापक Davidians थे. पर उनकी 65 साल की विधवा और डेविड के बीच संबंध स्थापित हो गया, जिससे Davidians के बेटे को एतराज़ था. यही कारण था कि उसने डेविड और उनके फॉलोवर्स को बाहर निकाल दिया. कुछ सालों बाद जब वो महिला मर गई, तो अपना कब्ज़ा स्थापित करने के लिए डेविड ने हथियारबंद अनुयायियों के साथ चर्च पर हमला कर दिया. उसे गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन जल्द ही वह छूट गया. इसके बाद कोरेश ने उसकी जागीर पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और अनुयायियों से मन माफ़िक काम करवाने लगा. Branch Davidians में एक अलग कानून चलने लगा था, वहां बच्चों को मारा जाता था, 13 और 10 साल की बच्चियों के साथ घिनौना अपराध होता था. बाद में कोरश के सभी अनुयायियों की मौत हो गई.

8. जोसफ दी मेम्बरो & लुक जॉर्जेट

Solar Temple स्विट्ज़रलैंड में स्थित है, लेकिन इसे यूरोप के कई हिस्सों से चलाया जाता है. यहां तक कनाडा के उन क्षेत्रों से भी इसे नियंत्रित किया जाता है, जहां फ्रेंच बोली जाती है. जोसेफ इसी संस्था का Co-Ruler था. ये लोग कई तरह की बातों का समर्थन करते थे. लेकिन जब क्योबिक के सदस्य के एक तीन साल बच्चे की मौत हो गई. इसके बाद एकाएक पंथ में बच्चों की मौत होने लगी. बाद में इस ग्रुप के सभी लोगों ने आत्महत्या कर ली. इसमें लगभग 90 लोगों की जान गई थीं.

9. मार्शल अप्पलव्हाइट

स्वर्ग के दरवाजे की खोज करने वाले शख़्स यही थे, इन्होंने पहली बार कंप्यूटर के द्वारा लोगों को शिक्षा देनी आरंभ की. इनका दावा था कि वो जीज़स का पुनर्जन्म है. मार्शल अपने अनुयायियों से मांग करता था कि वे सभी प्रकार की कामुक इच्छाओं को त्याग दें. लेकिन इस ग्रुप का अंत बेहद ही दर्दनाक तरीके से हुआ. मार्शल के साथ-साथ उनके ग्रुप के 38 अनुयायियों ने आत्महत्या के लिए Asphyxiation (ऑक्सीजन की कमी से मौत हो जाती है) का तरीका अपनाया ताकि वे स्वर्ग के दरवाजे पर पहुंच सकें.

10. शोको असहारा

शोको जापान के पंथ Aum Shinrikyo का नेता था, जो अपने ज़हर और गैस के हमलों के कारण कुख्यात था. उनका दावा था कि वे अपने अनुयायियों के नकारात्मक कर्मों को सकारात्मक बना सकते हैं. उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए खुद ही योग के आसन बनाए, जिसका एक हिस्सा शॉक थेरपी भी थी. लेकिन बाद में शोको अपने पंथ की आलोचना करने वाले लोगों को मारने लगे थे. जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और कुछ समय तक उनका ट्रायल चला. 2004 में उन्हें मौत की सजा सुना दी गई.

11. रविल लेबरों

लेबरों की 13 पत्नियां थीं, जो Breakaway Mormon Polygamist Sect का लीडर था. इसे अपने पंथ से इतना लगाव था कि जो भी अनुयायी इसे छोड़ने की कोशिश करता, वह उसे मौत के घाट उतार देता था. यहां तक कि इसने अपनी जवान बेटी को भी मार दिया. बाद में जब इसके राज़ खुलने लगे तो यह मेक्सिको भाग गया, पर अंत में पकड़ा गया. जब जांच खत्म हुई तो लेबरों को मौत की सजा सुना दी गई.

12. यहोवाह बेन यहोवाह

यहोवाह बेन यूनाइटेड स्टेट के Black-Supremacist पंथ का लीडर था, जिसे 'नेशन ऑफ यहोवाह' के नाम से भी जाना जाता है. इनका दावा था कि बाइबिल में बताए गए सभी किरदार वास्तव में काले रंग के हैं. उनका यह भी दावा था कि वो मसीहा हैं. बाद में उनके द्वारा चलाया गया एक आंदोलन मियामी में काफी फैला. उस दौरान काले और गोरे रंग को लेकर बड़ी लड़ाई चल रही थी. लेकिन जब 1990 में सच सामने आया तो यहोवाह पर 14 खून का आरोप लगाया गया. उनको 18 साल की सजा हुई. जिनमें से 11 साल उसने जेल में बिताए और छूटने के 6 वर्ष बाद मृत्यु हो गई.

13. वालेन्तीना दे एंड्राडे

वालेंतीना ब्राजील के Lineamiento Universal Superior नाम के पंथ की नेता थी. 1990 से पहले यह बात सामने आई कि सड़क पर रहने वाले अधिकतर युवा लड़कों को अगवा कर उन्हें मार दिया जाता था. जब उनमें से एक लड़का इस कैद से भाग आया तो उसने बताया कि उसे एलियन टीचर ने अगवा किया था. वो सभी युवा 1981 के बाद जन्मे थे.

14. चार्ल्स मानसून

Insane Hippie पंथ का लीडर चार्ल्स दूसरे हत्यारों से प्रभावित था, जो सेन फ्रेंसिस्को में कुछ खास बातों के लिए पहचाना जाता था. चार्ल्स चाहता था कि जो उसके दिमाग में युद्ध की कल्पना चल रही है, उसके वास्तविक रूप लेने पर वह साथ आएं. इस व्यक्ति ने 9 लोगों की हत्या की, जिसके बाद इसे जेल में डाल दिया गया.

15. स्वामी प्रेमानंद

श्रीलंका के गुरु स्वीमा प्रेमानंद भारत में एक आध्यात्मिक आंदोलन चलाने आये थे. उनका आश्रम श्रीलंका के रिफ्यूजियों के लिए घर है. इस आश्रम में बच्चे और लड़कियां भी रहा करती थीं. कुछ समय बाद खुलासा हुआ कि स्वामी ने आश्रम की लड़की के साथ बलात्कार किया है. इसके बाद चौंकाने वाली एक और बात सामने आई कि आश्रम में रहने वाली 13 लड़कियों को प्रेमानंद सेक्स स्लेव की तरह रखता है. जब एक व्यक्ति उसकी इस करतूत को जगजाहिर करने वाला था, तो उसकी हत्या कर दी गई. प्रेमानंद को सजा हुई, जिसके बाद जेल में ही मौत हो गई. खैर, इसके बाद भी बाबा के भक्त इनके लिए आंदोलन कर रहे हैं.

इतिहास में इतना कुछ घट चुका है, इसके बावजूद भी हम उससे कुछ सीखते ही नहीं.

Source: acidcow