भारत में LGBTQ होना क़ानूनन जुर्म है. भारतीय दंड संहिता(IPC) के सेक्शन 370 के मुताबिक 'क़ुदरत के क़ानून के खिलाफ़ कोई भी Sexual Activity' करना क़ानूनन जुर्म है. ऐसा करने वाले सज़ा के पात्र हैं. ये क़ानून अंग्रेज़ों के समय में 1861 में बनाया गया था. तब से अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं आया है.

Section 370 को ख़त्म करने के लिए कई लोगों ने कई लड़ाईयां लड़ी और अलग-अलग Platform का सहारा लिया पर ना तो कोई सरकार इसमें बदलाव ला पाई और ना ही हमारा समाज इसे स्वीकार कर सका है.

LGBTQ, समाज और परिवार के डर से अपनी सच्चाई कभी स्वीकार नहीं कर पाते. यही नहीं ऐसे लोगों को कई बार Sexual Abuse भी झेलना पड़ता है.

अपनी हक़ीक़त स्वीकारना इनके लिए आसान नहीं होता. कुछ ऐसी ही कहानी है Angelique Pinto की. Angelina एक Pansexual(ऐसे इंसान जो किसी से भी Attract हो जाएं) हैं और उन्होंने Humans of Bombay पेज पर अपनी कहानी साझा की.

ये है उनकी कहानी-

'मैं एक Pansexual हूं... यानी मैं हर Gender से आकर्षित हो जाती हूं. मैं Gender Queer भी हूं. कभी-कभी मैं पुरुष की तरह महसूस करती हूं, तो कभी नारी की तरह. लेकिन मैं Queer हूं.

मैं 12 साल की थी जब मुझे लगा कि मैं महिलाओं की तरफ़ आकर्षित हूं. हम दुबई में रहते थे और मुझे मेरी एक दोस्त अच्छी लगने लगी. मैंने अपनी दो क़रीबी दोस्तों को बताया कि मुझे लगता है कि मैं Lesbian हूं. उनका रवैया बिल्कुल दोस्ताना नहीं था. हम लोगों के बीच एक दरार आ गई. हम साथ होते हुए भी अलग ही रहते थे. Sleepovers के वक़्त वो दोनों बिस्तर पर सोते और मुझे ज़मीन पर सोने को कह देते. मैंने कई बार उन्हें मेरे बारे में फुसफुसाकर बात करते सुना.

दुबई Queer लोगों के लिए नहीं है. इसलिये अगले कुछ सालों के लिए मैंने अपनी सच्चाई अपने अंदर छिपा ली. ये तब बदला जब हम साउथ अफ़्रीका शिफ़्ट हुए. वहां के लोग Gays को लेकर Liberal हैं.

मैं और मां एक दिन किचन में काम कर रहे थे और बातें कर रहे थे, तभी उन्होंने कहा

'किसी भी पुरुष पर आश्रित मत होना.'

मैंने पूछा और स्त्री पर?

इस पर मेरी मां ने कहा कि ख़ुद के अलावा किसी पर भी निर्भर मत करना. मुझे लगता है कि मेरी मां कहीं न कहीं हमेशा से मेरी सच्चाई जानती थीं.

इसके बाद मैंने अपने कुछ दोस्तों को बताया कि मैं Queer हूं. लेकिन मैं अपनी आंटी का जवाब कभी नहीं भूलूंगी.

एक दिन उन्होंने मुझसे Boyfriends के बारे में पूछा, मैंने कहा कि मुझे लड़कों से ज़्यादा लड़कियां पसंद हैं. इस पर उन्होंने मेरी Girlfriend के बारे में पूछा.

मेरी आंटी ने जिस तरह से मुझे तुरंत Accept किया वो मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी.

मेरे परिवार का मुझे यूं अपनाना काफ़ी महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि 9 साल की उम्र से ही मुझे Sexually Abuse किया गया. मैं सिर्फ़ 9 साल की थी जब मेरे रिश्तेदार ने मेरे साथ बलात्कार किया था.

मैंने कई बार ख़ुद से ये सवाल किया कि कहीं मेरा Queer होना ही तो मेरे Sexually Abuse होने का कारण तो नहीं. कई साल के Psychotherapy और Intensive Healing के बाद मैंने जाना कि Queer होना मेरी Choice नहीं थी, ये तो मेरे अंदर हमेशा से ही था, अपने आप ही.

मैं काफ़ी समय तक पुरुषों से डरती थी. लेकिन अब मैं नहीं डरती. अब मैं जानती हूं कि जो मेरे साथ हुआ उसमें मेरी कोई ग़लती नहीं थी. मैंने अपने आप से कई सालों तक लंबी लड़ाई लड़ी, ख़ुद की हक़ीक़त को स्वीकारना कितना मुश्किल होता है ये मैं अच्छे से समझती हूं.

जिसने मेरा रेप किया वो Straight था, लेकिन फिर भी उसने मेरा रेप किया, ये अमानवीय है. तो दूसरों को Judge करने के बजाये हम ख़ुद को अच्छा इंसान बनाने कि कोशिश क्यों नहीं करते?'

हमारा समाज कितना भी विकसित हो जाए लेकिन जब तक यहां हर एक व्यक्ति को जीने का एक समान अधिकार नहीं मिल जाता, हम पूरी तरह विकसित नहीं हो सकते.