यूं तो पान-मसाले के धब्बों को मिटाना, बिल्कुल आसान काम नहीं है. पर मुंबई स्थित रुईया महाविद्यालय के युवा छात्राओं ने अपनी क़ाबिलियत से इस नामुमकिन से काम को मुमकिन बना डाला. इस अनोखे प्रयास के लिये, उन्हें अमेरिका के बॉस्टन स्थित Massachusetts Institute of Technology (MIT) की तरफ से विश्व शोध प्रतियोगिता के दौरान गोल्ड मेडल से भी नवाज़ा गया.

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MIT द्वारा हर साल इंटरनेशनल जिनेटकली इंजीनियर्ड मशीन (iGEM) नामक विश्वव्यापी शोध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है. इस प्रतियोगता में उच्च दर्जे के शोध को जगह दी जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, स्पर्धा में 300 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया था. टीम को इंवेट में हिस्सा लेने के लिये Biotechnology डिपार्टमेंट की तरफ़ से 10 लाख रुपये भी दिये गये थे.

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विजेता टीम के अनुसार, इस शोध के लिये उन्हें स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा मिली, जिसके बाद उन्होंने कई जानकारी जुटाई और उन पर एक्सपेरिमेंट कर इसे सफ़ल बनाया. छात्राओं के इस शोध के बाद सार्वजनिक स्थानों पर Microbes और Enzymes की मदद से पान के ज़िद्दी दाग़-धब्बों को हानिरहित रंगहीन उत्पाद में बदल दिया जायेगा.

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वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस शोध में शामिल में अंजली वैद्य, ऐश्वर्या राजूरकर, कोमल परब, श्रृतिका सावंत, निष्ठा पांगे, मैथिली सावंत, मीताली पाटील और सानिका आंबरे से मुलाक़ात की और उनके काम की प्रशंसा की. इसके साथ ही इन सभी स्टूडेंट्स को सम्मानित भी किया. इस शोध के अलावा छात्राओं ने सोशल मीडिया पर #PaanSePareshan मुहिम भी चलाई, ताकि लोगों को जागरुक किया जा सके.

मुंबई में सरकारी कार्यालय हो या ऐतिहासिक स्थल हर जगह पान दाग़ साफ़-साफ़ देखे जा सकते है, जिन धब्बों को मिटाने के लिये रोज़ाना कई लीटर पानी और पैसे भी ख़र्च किये जाते हैं. छात्राओं को इस बेहद उम्दा कार्य के लिये बधाई, लेकिन आप लोग कृपया सड़क और इमारतों पर पान न थूक कर देश को स्वच्छ बनाने में सहयोग दें.

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