रोज़ की तरह वो निकला था घर से...

कोई नयी नौकरी के इंटरव्यू पर
कोई बच्चे को स्कूल तक ले जाने

कोई दोस्त के संग वक़्त गुज़ारने
कोई बीवी से झगड़ कर गुस्सा उतारने

कोई प्यार के चक्कर में
कोई बस या ट्रेन के पीछे

रोज़ की तरह वो निकला था घर से

उसको नहीं पता था कि वो उसका आखरी दिन है
कहीं एक कदम पर मौत उसके इंतज़ार में है

रोज़ की तरह वो तो निकला था घर वापस आने
पर कहीं और भेज दिया उन दहशत फैलाने वालों ने

कुछ आँखें अब भी उसकी याद में गीली हैं
अब तो इंतज़ार की गलियां सूनी की सूनी हैं... सूनी की सूनी हैं!


साल 2008 का वो दिन जब 10 आतंकवादियों ने मुंबई में 12 हमलों के द्वारा दहशत फैलाई.
जिसमें 164 बेकसूरों की जानें गईं और करीब 308 लोग घायल हुए.
वो दिन, जिसे भारत क्या विश्व के लिए भूलना मुश्किल है.
आज हम देते हैं उन सभी को श्रद्धांजलि, जिन्होंने इतना भयानक हमला देखा और उससे ज़िंदा न निकल पाये.
आज हम करते हैं अमन की प्रार्थना क्योंकि जिन लोगों ने अपनों को खोया, उनके दर्द में हम शामिल हो पाएं.

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