साधु, बाबा, अघोरी ये सब शब्द सुनकर एक ही जैसी छवि दिमाग में बनती है. गेरुआ वस्त्र धारी या कम से कम वस्त्र धारी, गले में ढेर सारी मालाएं, शरीर पर भस्म और लंबी-लंबी जटाएं. जैन धर्म के बाबा तो निर्वस्त्र ही घूमते हैं. साधु यानि कि वो व्यक्ति जिन्होंने सांसारिक मोह-माया त्याग दी है. आध्यात्म के रास्ते पर चलने वाले ये साधु मोक्ष की तलाश में रहते हैं.

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बाबा से जुड़े घोटाले इतने ज़्यादा बढ़ गए हैं कि हमें साधु, बाबा सब ढोंगी ही लगते हैं. बहुत से लोग आध्यात्म के नाम पर गलत कामों में लिप्त होते हैं. ऐसे में हमारे विश्वास का डगमगाना जायज़ है.

ढोंगियों के बीच एक ऐसे साधु हैं, मुनि बाबा, जो 'Silent Baba' के नाम से मश्हूर हैं. नाम से आप कुछ अंदाज़ा लगा सकते हैं. सही पकड़ा है आपने, मुनि बाबा ने पिछले 9 सालों से कुछ बोला ही नहीं है.

Silent बाबा 14,200 फ़ीट की ऊंचाई पर, हिमालय की गोद में बसे, तपोवन नाम के स्थान पर रहते हैं. गौमुख पर्वत के पास है तपोवन. गौमुख यानि की गंगा के उद्गम स्थल के पास स्थित वो पर्वत, जो गंगोत्री से निकलती गंगा के वेग को नियंत्रित करता है. भागीरथी के तट पर बसे अपने टूटे-फूटे आश्रम में रहते हैं ये बाबा.

Silent बाबा, अकेले रहते हैं. कोई दोस्त नहीं, कोई साथी नहीं. दूसरों की बातों का जवाब बाबा लिख के देते हैं.

Silent बाबा, के इतने लंबे समय से मौन धारण करने का कारण है एक नदी, गंगा नदी. वही गंगा नदी, जिसका पानी सालों-साल तक खराब नहीं होता और जिसको गंदा करने में हमने कोई कसर बाकी नहीं रखी. इसी नदी के नाम पर राजनेताओं ने भी अपने घर भरे. पर सफ़ाई के नाम पर गंगा की हालत में ज़्यादा सुधार नहीं आया है.

Silent बाबा के अनुसार, उन्होंने श्रद्धा से मां गंगा के लिए मौन व्रत रखा है. उनका मानना है कि उनके चुप रहने से गंगा नदी की हालत में सुधार आएगा. अगर मां गंगा को भी वही प्यार नहीं दिया गया, तो मां, महादेव के समान रौद्र रूप भी धारण कर सकती हैं. गंगा से प्यार का मतलब गंगा की सफ़ाई से ही है.

मुनि बाबा ने 27 दिसंबर 2008 से कुछ नहीं कहा है, लिखकर उन्होंने बताया,

'मेरे गुरू ने मुझे मौन व्रत धारण करने के लिए प्रेरित किया. मैं जब तक ज़िन्दा रहूंगा, चुप रहूंगा. मेरे गुरू मुझे बाहरी लोगों से बात करने के लिए डांटेंगे.'

मुनि बाबा, स्वास्थ्य मंत्रालय में क्लर्क थे. वे हमेशा ज़ोर-ज़ोर से प्रार्थना करते थे और ये उनके बॉस को पसंद नहीं था. एक वक़्त आया जब उन्हें नौकरी और धर्म में से किसी एक को चुनना था और उन्होंने धर्म को चुना. 36 वर्ष की आयु में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और साधु बन गए.

Silent बाबा मौन रहकर ही देश और मां गंगा की सेवा करना चाहते हैं.

देखिए Silent बाबा का ये वीडियो:

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