रमज़ान के पवित्र महीने में एक मुस्लिम परिवार ने अपने घर में शनि देव और सांई बाबा की मूर्ति स्थापित करके दुनिया को बता दिया कि इंसान मज़हब के नाम पर भले ही लड़ ले, लेकिन आस्था का कोई मज़हब नहीं होता.

शनि जयंती के दिन विधिवत हवन-पूजन के बाद शनि और साईं बाबा की मूर्ती स्थापना करने वाली मुन्नी बेगम मुस्लिम हैं, लेकिन वे नमाज़ भी पढ़ती हैं और पूजा भी करती हैं. मुन्नी बेग़म जिस मोहल्ले में रहती हैं ,वहां मुस्लिम आबादी अधिक है. 40 घर मुस्लिमों के हैं, तो 20 घर हिन्दुओं के.

6 साल पहले मुन्नी बेगम की तबियत अचानक से ख़राब हो गई, जिसके बाद से वे आंशिक रूप से Paralyzed हो गई थीं. उन्होंने शनि देव से मन्नत मांगी कि जब वो स्वस्थ हो जाएंगी, तब शनि मंदिर बनवाएंगी.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को मुन्नी बेगम ने बताया कि, 6 साल पहले उन्हें Paralysis का अटैक आया था, जिसके बाद से वे स्वस्थ होने की सारी आशा छोड़ चुकी थीं. उन्हें किसी ने रुनकता के शनि मंदिर में जाकर मन्नत मांगने और पूजा करने को कहा. मंदिर जाने के दो महीने बाद से ही उनके स्वास्थ में सुधार होने लगा और अब वे पूरी तरह से ठीक हो गई हैं. उन्होंने बताया कि ये कृपा केवल शनि देव के चमत्कार से हुई है.

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मुन्नी बेगम ने शनि देव से मन्नत मांगी थी कि जब वे पूरी तरह से ठीक हो जाएंगी, तब अपने घर में शनि देव का मंदिर स्थापित करेंगी. इसलिए ही उन्होंने शनि मंदिर की स्थापना की है.

भारत में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जब लोगों ने धर्म से बढ़कर आस्था को सम्मान दिया है. अकसर हिन्दू मज़ारों पर मत्था टेकते हैं और मुस्लिम हिन्दुओं के त्योहारों में साथ-साथ रंगे नज़र आते हैं. शायद इन्हीं लोगों की वजह से भारत, भारत है.

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