Source: Representational Image
एक दिन, जब मैंने अपनी 5 साल की बेटी को ‘good and bad touch’ के बारे में समझाने के लिए एक वीडियो दिखाया, तो देखते ही उसने कहा, 'मैं ये खेल चाचा के साथ रोज़ खेलती हूं'

ये शब्द एक मां के हैं, जो वर्किंग है और एक ज्यॉइंट फ़ैमिली में रहती हैं. उन्होंने अपनी बेटी के साथ हुए यौन शोषण का पूरा वाकया हिंदुस्तान की टीम को बताया. वो बताती हैं:

मैं अपने ऑफ़िस में इतनी बिज़ी रहती हूं कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी 5 साल की बेटी घर में इस हादसे से गुज़री. लेकिन मेरे पास वाजिब वजह थी कि मैं बेफिक्र होकर अपनी बेटी को घर पर छोड़ सकती थी. क्योंकि मैं एक संयुक्त परिवार से ताल्लुक रखती हूं, तो मेरी मासूम बच्ची असुरक्षित और कभी अकेली नहीं रहेगी. वहां उसके साथ उसके दादा-दादी, भाई-बहन और चाचा और चाची भी तो हैं.

मगर एक दिन मेरी बेटी बीमार हुई. साथ ही वो गुमसुम रहने लगी और वो दूसरे बच्चों की तरह बाहर जाकर खेलने के बजाय घर में ही रहने लगी. जब मैंने उससे इस बारे में पूछा, तो उसने मुझसे अपने गुप्तांगों और पेट में दर्द की शिकायत की. उसकी बात सुनकर मुझे लगा कि बदलते मौसम की वजह से उसको दर्द हो रहा होगा. साथ ही मैंने उसको समझाया कि उसको अपने प्राइवेट पार्ट्स को साफ़ रखना चाहिए और खूब सारा पानी पीना चाहिए. लेकिन कुछ दिन बाद मुझे ये एहसास हुआ कि शायद उसकी परेशानी कुछ और है.

इसलिए उसकी परेशानी को समझने के लिए जब एक दिन मैंने उसको ‘Good and Bad Touch’ के बारे में समझाने के लिए एक वीडियो दिखाया, तो देखते ही उसने कहा, 'मैं ये खेल चाचा के साथ रोज़ खेलती हूं'. सुनते ही मैं हैरान हो गई. उसके बाद मैंने उसको वो वीडियो फिर से दिखाया और उससे उस 'खेल' के बारे में डिटेल में पूछा.

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तब उसने जो बताया, तो मेरे पैरों के तले ज़मीन खिसक गई. उसने बताया उस गेम का नाम 'Demon and Monster’ था. इस गेम में सबको छुपना होगा और जो छुपे हुए लोगों को ढूंढने में कामयाब होगा, वो बाकियों के साथ वो सब कर सकता है, जो वो करना चाहता है. कोई उसको मना नहीं कर सकता है. उसके बाद उसने बताया कि जैसे ही बाकी सब बच्चे छुप गए, तब मेरे देवर ने उसके साथ यौन शोषण किया. साथ ही उसने कहा कि चाचा ने कहा था कि ये इस गेम का हिस्सा है.

जब मैंने अपने पति को इस बारे में बताया तो उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया. इसलिए मैंने अकेले ही अपनी बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का निर्णय लिया. मेरे देवर के इस कुकर्म ने मेरी बच्ची को दर्द तो दिया ही, साथ ही साथ उसके दिलो दिमाग पर भी गहरा असर डाला. बच्ची को इस सदमे से निकालने के लिए हमने कई महीनों तक उसकी काउंसिलिंग करवाई, लेकिन मेरा दावा है कि उसके मन पर हुए ये ज़ख्म ताउम्र उसके साथ रहेंगे, वो कभी इस हादसे को भुला नहीं पाएगी कि उसकी मासूमियत का कैसे उसके चाचा ने फ़ायदा उठाया था.

जब मैंने अपने देवर से इस बारे में पूछा, तो उसने इस बात को स्वीकार किया और माफ़ी भी मांगी. वहीं मेरी सास ने मुझसे कहा कि उससे गलती हो गई है और मुझे उसको माफ़ कर देना चाहिए. मगर मैं उसे सज़ा दिलवाए बिना नहीं छोडूंगी. ये बहुत ज़रूरी है कि उसके दिमाग से इस तरह की मानसिकता और प्रवृत्ति को निकालना होगा, वरना वो इसी तरह से बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाता रहेगा.

इसलिए मैंने उसके खिलाफ़ FIR दर्ज कराई. उसके बाद मेरे देवर को गिरफ़्तार किया गया और दो महींनो के लिए उसे जेल में रखा गया.

आज मेरे परिवार वाले मुझे दोषी मानते हैं कि क्योंकि मैंने अपनी बच्ची के साथ हुए यौन शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाई. उन सभी की हमदर्दी मेरे देवर के साथ है और वो लोग उसको ज़मानत पर छुड़वाने के लिए एड़ी-छोटी का ज़ोर लगा रहे हैं.

मेरे परिवार वाले उसको नाबालिग साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उसको सज़ा से बचाया जा सके. पर मुझे पता है कि वो नाबालिग नहीं है और भले ही कोई मेरा साथ दे या ना दे, मैं तब तक अपनी ये लड़ाई जारी रखूंगी, जब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता.

ये पूरा वाकया इस बात को साबित कर रहा है कि विकृत मानसिकता वाले इस समाज में घर हो या बाहर कहीं भी चाहे फिर वो एक 5 साल की मासूम बच्ची हो, 20 साल की लड़की, या फिर एक 80 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला, कोई सुरक्षित नहीं है. एक आंकड़ें के अनुसार, हर दिन बाल यौन शोषण के कारण 5 बच्चों की मौत हो जाती है. क्या आप ऐसी कोई जगह बता सकते हैं, जहां एक महिला पूरी तरह सुरक्षित हो?

Source: hindustantimes