जब तक रहेगा समोसे में आलू... तेरा रहूंगा ओ मेरी शालू...

ये गाना भले ही दुनिया की किसी शालू को पसंद नहीं आया हो, लेकिन समोसा लवर्स को बहुत पसदं आया होगा. हमारे हिन्दुस्तान में हर राज्य, हर शहर का रहन-सहन, खान-पान भले ही अलग हो, मगर देश में एक चीज़ कॉमन है और वो है समोसा. बाई गॉड मुझे तो समोसा बहुत पसंद है. मैंने महंगे से महंगा और 10 रुपये में मिलने वाले 5 समोसे भी खाये हैं. आह हा... याद करते ही मुंह में पानी आ गया. अरे क्या कहा, आपको समोसा पसंद नहीं... क्या यार आप कैसे बोल सकते हो ये. वैसे बुरा मत मानना, लेकिन कुछ ही लोग हैं जिनको समोसा पसंद न हो, वरना नाश्ते की बात हो, तो सबसे पहले समोसे का नाम ही आता है.

मेरे लिए तो Samosa Is Love... मैं सुबह-शाम, दिन-रात, ब्रेकफ़ास्ट, लंच, इवनिंग स्नैक्स और डिनर हर वक़्त समोसा खा सकती हूं. मुझे तो आज भी याद है, जब घर में कोई मेहमान आता था, तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता था, क्यों? अरे भाई अब मेहमानों के लिए तो समोसा आता ही था, और जब उनके लिए आता था, तो बाकी सब लोगों के लिए भी आता था. आज कल वैसे तो कई तरह के समोसे बनने लगे हैं लेकिन आलू वाले समोसे जैसे स्वाद किसी में नहीं.

समोसे के लिए मेरा प्यार अलग है, क्यों नीचे देख लो:

समोसा तीखा और Hot तो होता ही है, साथ ही हमेशा मिल जाता है. अब ऐसी चीज़ कोई कैसे प्यार ना करे.

कुछ लोग इसे Oily और Unhealthy बोलते हैं, पर कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना... सही कहा न? लेकिन मुझको इन बातों से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है. सच बताऊं, तो ऐसे लोगों पर ट्रस्ट ही नहीं करना चाहिए, जिनको समोसा पसंद न हो.

समोसे के साथ मेरी कितनी यादें जुड़ी हैं:

जब मैंने पहली बार समोसा खाया था, वो बहुत गर्म था, पर जब उनकी पहली बाईट ली थी, मज़ा ही आ गया था और तब से मेरा ऑल टाइम फ़ेवरेट है समोसा.

और तब से:

मेरी वो स्कूल कैंटीन, जहां दोस्तों के साथ बैठकर समोसे खाते थे, उन यादों के साथ समोसे का वो स्वाद आज भी मुंह में पानी लाता है.

स्कूल की कैंटीन ही क्यों दोस्तों या कज़िन्स के साथ जब मूवी देखने या शॉपिंग के लिए जाते, तो थोड़ा टाइम तो समोसे के लिए निकाल ही लेते थे.

उन दिनों को तो मैं कभी भूल ही नहीं सकती, जब मैं जॉब करने के लिए दूसरे शहर में अकेले रहने आई थी, और भूख लगने पर गली के नुक्कड़ पर लगने वाले समोसे के ठेले से 10 रुपये के पांच समोसे लेती थी और चाय के साथ उनको खाती थी. कई बार तो ऑफ़िस से आने के बाद मेरा डिनर हुआ करता था समोसा.

और आज भी जब चाहो समोसा तो मिल ही जाता है खाने के लिए. या यूं कह लो कि जिस ऑफ़िस में किचन होगी, वहां समोसा भी होगा.

लेकिन बिना चटनी अधूरा है और जब चटनी न मिले तो:

सच कहूं तो मेरे सामने चाइनीज़, इटैलियन, साउथ इंडियन, लेबनीज़ कोई भी खाना रख दो, मगर अगर इन सबके बीच एक समोसा होगा तो मैं उसे ही खाना पसंद करूंगी.

और आखिर में मुझे ये कहने में कोई दिक्कत नहीं है कि समोसे में आलू रहे न रहे, लेकिन समोसे के लिए मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा...