आज दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में देश के सर्वोच्च सम्मान यानि कि 65वें राष्ट्रीय पुरस्कारों का वितरण समारोह आयोजित किया गया. इस समारोह में हिस्सा लेने और अपने पुरस्कार को ग्रहण करने के लिए ज़्यादातर विजेता एक दिन पहले (बुधवार) को ही दिल्ली पहुंच गए. लेकिन समारोह शुरू होने से कुछ समय पहले ही हुए एक एनाउंसमेंट ने सबको नाराज़ कर दिया जिसके बाद अधिकतर विजेताओं ने इसका बायकॉट करने की धमकी दी. हालांकि, सभी विजेताओं ने बुधवार (2 मई) को विज्ञान भवन में इवेंट की रिहर्सल प्रोग्राम में हिस्सा भी लिया.आइये अब जानते हैं कि ऐसा हुआ क्या जो ये स्थिति उत्पन्न हुई.

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द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अवॉर्ड सेरेमनी से ठीक पहले अंतिम समय में सभी को कार्यक्रम में किये गए बदलाव की सूचना दी गई. दरअसल, विजेताओं को ये सूचना दी गई कि वैसे तो राष्ट्रपति के हाथों से ही हर विनर को अवॉर्ड दिया जाता है. पर राष्ट्रपति, रामनाथ कोविंद इस कार्यक्रम के लिए सिर्फ़ एक घंटे का समय ही दे पाएंगे, इसलिए सभी प्रतिभागियों को उनके हाथ से पुरस्कार मिलना मुश्किल है. वो केवल 11 विजेताओं को पुरस्कार से सम्मानित कर पाएंगे. वहीं बाकी विनर्स को सूचना एवं प्रसारण मंत्री, स्मृति ईरानी पुरस्कार से सम्मानित करेंगी.

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यही वजह है कि कई विजेता इस बात से नाराज हैं कि इवेंट में 140 विजेताओं में से केवल 11 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मान मिलेगा. इस सूचना के बाद ही अधिकतर विजाताओं ने इवेंट के बहिष्कार की धमकी दे दी. उनका पॉइंट भी सही है कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है, और अचानक से कार्यक्रम में किया गया ये बदलाव उनको मंज़ूर नहीं.

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एक फ़िल्म निर्माता ने कहा, हमें बताया गया था कि हमेशा कि तरह इस बार भी राष्ट्रपत‍ि के हाथों सम्मान‍ मिलेगा. लेकिन रिहर्सल में पता चला कि इस बार ऐसा नहीं होगा. ये हमारे लिए अपमानजनक है. इसके विरोध में हमने आवाज़ उठाई है. पर आख़िरी फ़ैसला एडमिनिस्ट्रेटर की ओर से आने वाले फ़ैसले के बाद ही लिया जाएगा. हालांकि, विनर्स ने ये भी साफ़ कर दिया है कि हमारे विरोध का मतलब ये भी नहीं है कि वो पुरस्कार नहीं लेंगे, पर वो सभी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे. बुधवार को रिहर्सल के दौरान नाराज फिल्मी कलाकारों को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काफी समझाने-बुझाने की कोशिश की लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर नहीं दिखा. गुरुवार के कार्यक्रम में कई विजेताओं के गैरहाजिर रहने की आशंका प्रबल है.

प्रेसिडेंट के प्रेस सेक्रेटरी, अशोक मलिक ने कहा,

'जब सौ से ज़्यादा विजेता हों, तो ऐसे में राष्ट्रपत‍ि का सभी को पर्सनली अवॉर्ड दे पाना संभव नहीं है. वहीं उन्होंने ये भी साफ़ किया कि बाकी लोगों को ये अवॉर्ड केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर और सूचना और प्रसारण सेक्रेटरी नरेंद्र कुमार सिंह द्वारा दिया जाएगा.'
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वहीं बुधवार को विजेताओं की नाराज़गी को समझते हुए स्मृति ईरानी ने विजाताओं को दिया आश्वासन कि उन्होंने राष्ट्रपति के ऑफ़िस में इस बात की सूचना भेज दी है. साथ ही उन्होंने भी सबको ये समझने की कोशिश की कि राष्ट्रपति ने इस इवेंट के लिए प्रेजिडेंट ने उनको केवल एक घंटे का वक़्त दिया है, ऐसे में वो सबको पुरस्कार दे पाएं, ये मुमकिन नहीं है. हालांकि, इसका कितना असर हुआ है, ये कहना मुश्किल है. आज के कार्यक्रम में कई विजेताओं ने ग़ैरहाज़िर होकर इस अपनी नाराज़गी व्यक्त की है.

बता दें कि अभी ये बात सामने नहीं आयी है कि कौन-कौन इस सेरेमनी में मौजूद रहा और कौन नहीं. पर ये जान लीजिये कि आज दोपहर 3.15 बजे तक सभी विजेताओं को विज्ञान भवन में मौजूद होना था. सेरेमनी में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपत‍ि रामनाथ कोविद 5.30 बजे के आस-पास विज्ञान भवन पहुंचें. वहीं उनके पहुंचने तक कई लोगों को अवॉर्ड मिल भी गए हैं. कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति 45 विजेताओं के ग्रुप के साथ फ़ोटो खिंचवाएंगे.

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिए ये 11 अवॉर्ड्स

1. दादासाहेब फाल्‍के पुरस्‍कार : विनोद खन्ना

2. बेस्‍ट फीचर फिल्‍म: विलेज रॉकस्‍टार

3. बेस्‍ट एक्‍ट्रेस : श्रीदेवी (मॉम)

4. बेस्‍ट एक्‍टर: रिद्ध‍ि सेन (बंगाली फिल्म नगर कीर्तन)

5. बेस्‍ट डायरेक्‍टर: नागराज मंजुले

6. बेस्‍ट म्‍यूजिक डायरेक्‍शन: एआर रहमान

7. राष्‍ट्रीय एकता पर बनी फीचर फिल्‍म को नरगिस दत्त अवॉर्ड: धप्‍पा

8. सिनेमा पर बेस्‍ट बुक: मातामगी मनीपुर

9. बेस्‍ट जसारी फिल्‍म: सिंजर

10. बेस्‍ट मेल प्‍लेबैक सिंगर: केजे यसुदास

11. बेस्‍ट डायरेक्‍शन: जयराज

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राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार, मनोरंजन के क्षेत्र में फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों को उनके योगदान के लिए मिलने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है. सबसे बड़ी बात ये है कि सालों से ये सम्मान विजेताओं को देश के राष्ट्रपति के हाथों ही मिलता आ रहा है और इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया, तो फिर इस साल ऐसा क्या हो गया कि अचानक से इसमें इतना बड़ा बदलाव बिना किसी सूचना के कार्यक्रम शुरू होने से चंद घंटों पहले लोगों को बताया गया. ऐसा भी क्या हो गया जो राष्ट्रपति के पास एक दिन का समय नहीं है इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए? क्या ये विजेताओं के साथ नाइंसाफ़ी नहीं है, क्या ये जायज़ है?

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