नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की मौत कैसे हुई, ये सालों से एक रहस्य बना हुआ है. माना जाता है कि उनकी मौत विमान दुर्घटना में हुई थी. फ़्रेंच सीक्रेट सर्विस की दिसंबर 11, 1947 की रिपोर्ट ने सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठाया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, नेता जी की मौत जहाज़ दुर्घटना में नहीं हुई थी. फ़्रेंच सरकार ने हमेशा इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन इस रिपोर्ट ने कई रहस्यों को बेनक़ाब कर दिया है.

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इस रिपोर्ट की मानें, तो बोस 1947 तक ज़िन्दा थे. भारतीय सरकार ने भी नेता जी की मौत से जुड़े रहस्यों को जानने के लिए तीन कमिटियों का गठन किया था. शाह नवाज़ कमिटी (1956) और खोसला कमीशन (1970) का कहना है कि अगस्त 18, 1945 में जापान के तैहोकू एयरपोर्ट पर हुए एक क्रैश के दौरान उनकी मौत हुई. मुखर्जी कमीशन (1999) का कहना था कि उनकी मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी. हालांकि सरकार ने इस कमिटी के निष्कर्षों को ठुकरा दिया था, लेकिन इस बारे में रिसर्च चलती रही.

पेरिस के इतिहासकार, जेबीपी मोरे ने फ़्रेंच सीक्रेट सर्विस की दिसंबर 11, 1947 की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि बोस की मृत्यु का कारण विमान हादसा नहीं था.

मोरे का कहना है कि फ्रांस के ख़ुफ़िया विभाग का मानना है कि बोस 18 अगस्त 1947 में प्लेन क्रैश में नहीं मारे गए थे, बल्कि वह इंडो-चीन से बच निकलने में सफ़ल हुए थे. उनके ठिकाने के बारे में 11 दिसंबर 1947 तक किसी को पता नहीं था. इससे साफ़ है कि वह कहीं ना कहीं 1947 तक ज़िन्दा थे. वह इंडोचाइना से गायब हो गए थे और उसके बाद उन्होंने गुमनामी का जीवन जिया.
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ब्रिटिश और जापानियों ने भी घोषित कर दिया था कि बोइंग विमान के साइगॉन से टोक्यो आने के बाद हुए एयर क्रैश में उनका निधन हो गया था. 1945 में जापान की पराजय और आत्मसमर्पण के तुरंत बाद, फ्रेंच सैनिकों के साथ ब्रिटिश सैनिकों ने साइगॉन पर कब्ज़ा कर लिया था.

किंग्च नाग जैसे विद्वानों ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. नाग, एक प्रसिद्ध पत्रकार और पुस्तक 'नेताजी: लिविंग डेंजरसली' के लेखक हैं.

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