आजकल के बच्चे किसी भी मामले में कम नहीं हैं. लेटेस्ट गैजेट से लेकर क्या ट्रेंड में है, उन्हें सब पता रहता है. इन बच्चों का टैलेंट देखना है, तो किसी Science Exhibition में चले जाईये, आपको एक से एक धुरंधर मिल जाएंगे. 5वीं-6ठी क्लास के बच्चे ऐसे-ऐसे गैजेट्स बना रहे हैं, जिनका आने वाले समय में बहुत अच्छा उपयोग हो सकता है.

हाल ही में राजस्थान के एक स्कूल के कुछ स्टूडेंट्स को अपने स्टार्टअप के लिए 3 करोड़ की फन्डिंग मिली. इनका आईडिया भी बहुत अच्छा था, Flavored पानी बनाने का. इन्होंने इसमें देसी फ्लेवर्स ही इस्तेमाल किये, जैसे गुलाब, केवड़ा, खस-खस. इन बच्चों को देख कर दिमाग़ में एक ही सवाल आता है, ये पढ़ाई के साथ-साथ ये सब कैसे कर लेते हैं?

चलिए आपको मिलवाते हैं कुछ ऐसे ही नन्हें Entrepreneurs से, जिन्होंने अपने दिमाग़ और क्रिएटिविटी से एक से बढ़ कर एक चीज़ें बनायीं और देश का नाम रौशन किया:

1. स्मार्ट स्कूल बैग, आर्यन तंवर

छोटे-छोटे बच्चे अपने नाज़ुक से कंधों पर भारी-भरकम बैग टांगते हुए रोज़ स्कूल जाते हैं. इसका Solution निकाला 7वीं क्लास में पढ़ने वाले एक बच्चे ने. आर्यन तंवर ने एक ऐसा स्मार्ट स्कूल बैग तैयार किया है, जो आपको अपनेआप बता देगा कि टाइम टेबल के हिसाब से कौन सी बुक और कॉपी लेकर जानी है. ज़्यादातर बच्चे बैग में सब भर लेते हैं, उन किताबों को भी, जिनकी पढ़ाई नहीं होनी होती है. इस स्मार्ट बैग में LED लाइट होंगी, जो बुक्स पर पर लगे Radio Frequency Identification (RFID) की मदद से उस बुक या कॉपी की लाइट जला देगा, जो उस दिन ले जानी है. आर्यन इस बैग में एक Weather Sensor भी लगाने की सोच रहा है, जो पहले ही ये बता देगा कि बच्चे को छाता ले जाने की ज़रूरत है या नहीं.

ये लड़का सच में कमाल कर रहा है!

2. TRAECY - प्रदूषण रोकने और उसका पता लगाने वाला ट्रैकर

जिस भी जगह से प्रदूषण हो रहा है, उसका पता लगाने, उसकी जगह ट्रैक करने और इसे कम करने की डिवाइस है TRAECY - Traffic and Emission Control System. इस डिवाइस की मदद से आप ये आसानी पता लगा सकते हैं कि शहर में कहां सबसे ज़्यादा प्रदूषण है और इसे कैसे कम किया जा सकता है. बड़े-बड़े साइंटिस्ट्स को शर्म से पानी-पानी कर देगा 12वीं क्लास के बच्चों का बनाया ये मॉडल. इसे बनाने वाले बच्चों की टीम दिल्ली के DPS, RK Puram के स्टूडेंट्स की है. श्रेयस किशोर, प्रांशु मलिक, आदित्य सेनगुप्ता, दानिश बंसल, तन्मय बंसल, जिन सभी ने इस मॉडल को बनाने में मेहनत की, हमें विश्वास है, वो आगे जाकर ऐसे और कारनामे करेंगे.

3. Atmospheric Water Generator, शौर्य जैन

पानी Evaporate हो कर बादल बनता है, फिर बादल Condense हो कर बारिश करते हैं. बचपन में ये साइकिल स्कूल में सभी ने पढ़ी है, लेकिन इसका इस्तेमाल कर एक बेहतरीन मॉडल बनाया है शौर्य जैन ने. शौर्य ने सोलर एनर्जी से चलने वाली एक ऐसी डिवाइस बनायी है, जो Condensation प्रक्रिया का इस्तेमाल कर Atmosphere से पानी निकालने का काम करती है. उसका मकसद भारी-भरकम Atmospheric Water Generator की जगह अपनी ये डिवाइस इस्तेमाल करवाना है. देख कर यकीन है, वो इसे जल्द ही पूरा कर लेगा.

4. Automatic Home Surveillance Bot, हेमकेश अग्रवाल

10 साल की उम्र से रोबोट बना रहे हेमकेश ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है, जो आपकी अनुपस्थिति में घर में आग लगने की स्थिति को पहले से ही भांप लेगा. इसमें लगा सेंसर किसी चोर के आने को भी मोशन से पहचान लेगा. ये मज़ेदार Bot आप आराम से अपने फ़ोन के साथ Sync कर सकते हैं और आग या चोरी से आराम से बच सकते हैं. शाबाश लड़के!

5. देखने में अक्षम लोगों के लिए टॉर्च, संयम अग्रवाल

ये छोटे से बच्चे ने ऐसी बेहतरीन टॉर्च बनायी है, जो देखने में अक्षम व्यक्ति को बाहर चलने या घर में ही किसी दिक्कत से आगाह करने में मदद करेगी. ये टॉर्च उस वक़्त बीप करने लगेगी, जैसे ही आगे कुछ दिक्कत या कोई रुकावट होगी. संयम ने इसके साथ ऐसी LED लाइट्स भी बनायी हैं, जो Music की बीट्स के हिसाब से अपना कलर चेंज करेंगी. उसने एक ऐसा रोबोट भी बनाया है, जिसे आप आराम से फ़ोन से कंट्रोल कर सकते हैं.

इस लड़के में वाकई में दम है!

6. Braigo - Printer For Blind, सौरभ बनर्जी

भारत में दृष्टिहीन या फिर कुछ हद तक दृष्टिहीन लोगों की अच्छी-ख़ासी आबादी है. लेकिन ऐसा कम ही हुआ है कि उनकी दिनचर्या को आसान बनाने के लिए कोई डिवाइस बनाने का प्रयास किया गया हो. US में रहने वाले 13 साल के सौरभ बनर्जी ने Braigo नाम का एक ऐसा Blind Supportive प्रिंटर बनाया है, जिसमें आप दृष्टिहीनों के लिए उभरे हुए शब्दों के प्रिंट निकल सकते हैं. अमेरिका जैसे देश में, ब्लाइंड लोगों के लिए Text-to-Read मशीन आती है, जो शब्दों को ज़ोर-ज़ोर से पढ़ कर देती हैं. लेकिन इसकी कीमत इतनी ज़्यादा होती है कि हर कोई इसे अफ़ोर्ड नहीं कर सकता. इसकी तुलना अगर भारत से की जाए, तो दृष्टिहीन व्यक्ति सामान्य तौर पर इतना रसूखदार नहीं होता कि ऐसी डिवाइस ख़रीद सके.

सौरभ का Braigo प्रिंटर इन शब्दों को उभार कर दृष्टिहीन व्यक्ति के ज्ञान और मनोरंजन के लिए प्रयाप्त सामाग्री दे सकता है. इस प्रिंटर की मदद से वो जो चीज़ चाहे, पढ़ सकते हैं और बाक़ी लोगों की तरह Updated रह सकते हैं.

सौरभ का Braigo अमेरिका के इंजीनियरिंग मार्वेल्स में से एक माना जा रहा है, क्योंकि उसने इस प्रिंटर की कॉस्ट को 2000 डॉलर से 200 डॉलर तक कम कर दिया. ऐसा करने का प्रयास सिलिकॉन वैली के कई स्टार्टअप्स कर रहे हैं, लेकिन ज़्यादा कामयाब नहीं हुए.

उसका ये प्रोडक्ट कुछ समय में मार्केट में आ जाएगा और उसने जिस Lego Kit से अपना प्रिंटर बनाया है, उसको Assemble कर के आप भी अपने घर पर इसे बना सकते हैं. वो ऐसा इसलिए कर रहा है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को मदद मिले.

सौरभ का ये प्रिंटर भारत सहित दुनिया के सभी दृष्टिहीनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा.

7. Pancreatic Cancer Diagnosis Test, Jack Andraka

दिमाग़ में एक आईडिया है और जहां भी उसे सुनाते हो, लोग कहते हैं कि क्या बकवास है! ये बहुत लोगों के साथ बहुत बार होता है. लेकिन अगर तुम सच में उन Rejections की परवाह किये बिना आगे बढ़ो, तो तुम्हें कोई नहीं रोक सकता. Jack Andraka ने यही किया और 15 साल की उम्र में आज उसके बाद Pancreatic Cancer डिटेक्ट करने के टेस्ट का पेटेंट है.

Pancreatic Cancer बाक़ी कैंसर के मुक़ाबले बहुत देर में डिटेक्ट होता है, और जब तक ये पता चलता है, पेशेंट को बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता. Jack के परिवार में एक करीबी की मौत इसी कैंसर से हुई थी, इस हादसे ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया कि इस कैंसर का पता पहले भी लगाया जा सकता है. उसके दिमाग़ में जो थॉट्स थे, एक दिन बायोलॉजी की क्लास में उसे कहीं से उनसे जुड़ा एक तार मिल गया, फिर जैक ने अपने इस आईडिया को सभी Bio और पैथोलॉजी लैब्स में प्रेज़ेंट किया, ताकि वो इस पर काम कर सके. उसे अपने आईडिया को अस्तित्व में लाने के लिए एक लैब की ज़रूरत थी, लेकिन जहां भी वो गया, उसे निराशा ही हाथ लगी. करीब 199 Rejections के बाद एक जगह से उसे हां मिली और वो शुरू हो गया अपने काम में.

उसकी मेहनत का नतीजा ये था कि उसने Pancreatic Cancer के लिए एक ऐसा Diagnostic Test बना दिया, जो पहले से मौजूद Test से कई गुना बेहतर, जल्दी डिटेक्ट होने वाला, ज़्यादा सस्ता था और इसका इस्तेमाल Ovarian और लंग कैंसर का पता लगाने के लिए भी कर सकते थे.

अपनी इस मेहनत के लिए उसे दुनिया के सबसे बड़े Science और Engineering फ़ेयर में पहला प्राइज़ मिला. ये प्राइज़ था 1 लाख डॉलर का. इसके बाद Jack ने इस टेस्ट का पेटेंट करवा लिया.

सही कहते हैं, कुछ Achieve करने के लिए सालों का Experience या पैसे नहीं, हौसला चाहिए.

8. Silent Heart Attack को पता लगाने वाली चिप, आकाश मोहन

भारत में कई लोगों की मौत की वजह बनता है Silent Heart Attack. अमूमन हार्ट अटैक के जो Symptoms होते हैं, जैसे चेस्ट में पेन, सांस लेने में दिक्कत, वो सब इसमें नहीं होता. कई बार उबकाई, अपच या फ्लू के जैसे Symptoms ही Silent Heart Attack होते हैं, लेकिन हम इन्हें समझ नहीं पाते. एक Silent Heart Attack का दूसरा सबसे बड़ा ख़तरा होता है, इसके बाद आने वाला दूसरा हार्ट अटैक.

आकाश मनोज के दादाजी की डेथ भी ऐसे ही एक साइलेंट हार्ट अटैक से हुई थी. इसका उन्हें उनकी मौत के बाद पता चला. अपने दादाजी को खोने के बाद आकाश ने एक ऐसी डिवाइस बनाने की कोशिश की, जो साइलेंट हार्ट अटैक्स का पता लगा सके. अभी तक भारत में इसके लिए कोई टेस्ट या डिवाइस नहीं है.

आकाश ने एक ऐसे सिलिकॉन चिप को बनाया है, जो आप अपने हाथ या कान के पीछे लगा सकते हैं. ये चिप Positive चार्ज वाले Electrical Impulse की मदद से हार्ट से निकलने वाले नेगेटिव Impulse वाले प्रोटीन, FABP3 को आकर्षित करती है. जैसे ही इस प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा होने लगे, आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाने की ज़रूरत है. ये संकेत होता है साइलेंट हार्ट अटैक का. ऐसा करने से आप भविष्य में आने वाले सभी हार्ट अटैक से बच सकते हैं.

आकश अपनी इस चिप का पेटेंट करवा रहा है और अभी इस पर Human Trial चल रहा है, कुछ समय में बाद ये चिप मार्केट में आ जाएगी. वो अपने इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार को देना चाहता है, ताकि सबका भला हो. वो इसे किसी भी प्राइवेट कंपनी को नहीं देना चाहता, क्योंकि साफ़ है, वो इससे पैसे ही कमायेंगे.

साइलेंट हार्ट अटैक का कारण हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रोल लेवल होते हैं, आपको इन्हें नियंत्रित करने की ज़रूरत है.

9. Tester, जो बता देगा कि Electronic उपकरण ख़राब है या नहीं, रोहित

इस बच्चे ने घर पर ही एक ऐसा टेस्टर बनाया है, जिससे लाइट न होने पर भी बिजली उपकरणों में आने वाले करेंट का पता लगाया जा सकता है. रोहित के अनुसार, इस टेस्टर के एक तार को सॉकेट के एक सुराख में लगाते हैं और दूसरा तार बिजली उपकरण से जोड़ते हैं. इसी तरह सॉकेट के दूसरे सुराख में तार लगाकर चेक करते हैं. अगर किसी में भी टेस्टर का बल्ब जल जाता है, तो समझें कि उपकरण में करंट आ रहा है. वहीं, अगर सॉकेट के दोनों सुराखों में तार डालने से बल्ब जलता है, तो आपका उपकरण फुकने की कगार पर है. 

चूंकि टेस्टर को रोहित ने घर बैठे तैयार किया है, इसलिए इसमें दो छोटे सेल भी हैं. सॉकेट के संपर्क में आने पर Earthing आते ही ये जल उठता है.

10. Helix Safe, अक्षत प्रकाश

उत्तर प्रदेश के एक छात्र अक्षत प्रकाश ने ऐसी डिवाइस बनायी है, जो उन घायलों के लिए वरदान साबित होगी, जिन्हें सड़क दुर्घटना के बाद तुरंत इलाज नहीं मिल पाता. इस डिवाइस को ‘हेलिक्स सेफ़’ नाम दिया गया है. अक्षत ने इस डिवाइस का प्रदर्शन ताइवान में चल रहे ‘अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेला-2015’ में किया था. ये डिवाइस घायल व्यक्ति की हृदयगति का आंकलन कर, ख़ुद ही उसे दवा इंजेक्ट कर देती है. अक्षत का कहना है कि ‘अकसर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को लंबे समय तक मेडिकल सहायता नहीं मिल पाती, लेकिन अब यह डिवाइस ऐसे मरीज़ों को ‘लाइफ़ सपोर्ट ट्रीटमेंट’ उपलब्ध करा देगी.

'हेलिक्स सेफ़' व्यक्ति की धड़कनों के हिसाब से काम करती है. दुर्घटना के बाद धड़कन बढ़ने पर यह खतरे को भांप लेती है, और मरीज़ को ऑटोमेटिकली ज़रूरी दवा इंजेक्ट कर देती है. साथ ही ये डिवाइस नज़दीकी अस्पताल को भी हादसे की सूचना देकर अलर्ट करती है. अक्षत ने 2013 में डिवाइस के पेटेंट के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे अब जाकर इसका पेटेंट मिला है.

11. Emrgency Blood Bank 'ख़ून', चेतन

बेंगलुरु के रहने वाले चेतन एम. गौड़ा किसी मिसाल से कम नहीं हैं. 16 साल की उम्र में ब्लड बैंक खोल कर वे मानवता की मिसाल कायम कर रहे हैं. जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई करते हैं, खेलते- कूदते हैं, उस उम्र में चेतन लोगों को मरने से बचा रहे हैं. बात मई 2016 की है, जब चेतन के शिक्षक की मौत समय पर ख़ून नहीं मिलने के कारण हुई थी. इस बात से चेतन को काफ़ी तकलीफ़ हुई. 

उसी समय उसने निर्णय लिया कि अब किसी की मौत ख़ून की कमी के कारण नहीं होगी. अपने दोस्तों के सहयोग से उसने एक ब्लड बैंक खोला, जो आपातकाल में ज़रुरतमंदों को ख़ून देता है. चेतन ने अपने एनजीओ का नाम 'ख़ून' रखा है, जो लोगों की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध है. इतना ही नहीं, सरकार ने ख़ून दान करने के लिए जो कीमत तय की है, उसी कीमत पर आप यहां अपना ख़ून डोनेट कर सकते हैं.

12. 22 रिसर्च पेपर्स और 7 पेटेंट्स हैं इनके नाम, युवराज और यशराज

17 साल के युवराज और यशराज की आंखों में जीत के सपने हैं, जो हिन्दुस्तान को बदलने का माद्दा रखते हैं. जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखा करते हैं, उस उम्र में यशराज और युवराज ने विज्ञान से दोस्ती कर ली. इनकी दोस्ती कुछ कदर हुई कि अब वे इसी के हो गए. 7 साल की उम्र से विज्ञान के क्षेत्र में रिसर्च करनी शुरु की, जो अब तक जारी है और आगे भी जारी रहेगी. 17 साल की उम्र में वे 22 रिसर्च पेपर पर काम कर चुके हैं, अपनी 7 रिसर्च का वो पेटेंट करवा चुके हैं. इसके अलावा वो Zenith Vipers के को-फाउंडर्स भी हैं. अपनी मेहनत और लगन के कारण वे Ted-Ex जैसे प्लेटफॉर्म पर बुलाए जा चुके हैं. अब जल्द ही ब्रिटेन की एक संस्था इन्हें विज्ञान में अद्भुत खोज के लिए सम्मानित करेगी.

ये हैं इनके कुछ आविष्कार:

Bajra Purifier - विज्ञान जगत में एक अनोखी खोज है. अब बाजरे की मदद से पानी को शुद्ध किया जा सकता है. इसकी मदद से रासायनिक और ज़हरीले तत्वों को पानी से दूर किया जा सकता है. यह खोज वास्तव में अद्भुत है.

All In One Medical Assistance Machine - यशराज और युवराज इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हैं. दरअसल, यह एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस है, जिसकी मदद से आम इंसान की सभी शारीरिक जांचें एक साथ की जा सकती हैं. अगर यह प्रोग्राम सफ़ल हो गया, तो ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे नागरिकों को काफ़ी लाभ मिलेगा.

Brain Controlled Drone - Innovation के दौर में आज हर काम ड्रोन के ज़रिए किया जा रहा है. मगर, यश और युवराज का ड्रोन बहुत ही ख़ास है. क्योंकि अब आपके दिमाग से ड्रोन चलेगा.

कहा था न, ये छोटे पैकेट में बड़ा धमाका हैं!