कुछ दिनों पहले ही हरियाणा के हिसार में एक दादी ने अपनी पोती के गुप्तांग को इसलिए जला दिया था, क्योंकि दादी की चाहत थी उसकी गोद में पोता खेले. इस मामले ने जहां सारे देश को शर्मसार किया था, वहीं दूसरी ओर एक बार फिर भ्रूण हत्या जैसे विषय पर बहस को जन्म दे दिया था.

अभी इस मामले ने सारे देश का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा ही था कि गुजरात में एक ऐसा ही अन्य मामला प्रकाश में आया है. ख़बरों के मुताबिक, गुजरात के उन्नतनगर इलाके में एक नवजात को मरने के लिए झाड़ियों में सिर्फ़ इसलिए फेंक दिया गया था, क्योंकि वो नवजात एक लड़की थी.

झाड़ियों में लड़की का पता उस समय चला, जब वहां से गुजर रहे लोगों को बच्ची के रोने की आवाज़ सुनाई दी. लड़की को झाड़ियों में दो फ़ीट नीचे की तरफ़ फेंका गया था, जिससे उसके शरीर में कांटे लगने की वजह से कई जगह जख़्म भी हो गए

यहां से गुज़र रहे लोगों ने जब बच्ची की आवाज़ को सुना, तो उन्होंने बिना देर किये एम्बुलेंस को इसकी सूचना दी. इसके बाद बच्ची को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. डॉक्टरों का कहना है कि 'अगर कुछ देर और हो गई होती, तो शायद हम बच्ची को न बचा पाते. झाड़ी में फेंकने की वजह से उसके शरीर में काफ़ी चोटें आई हैं.' पुलिस भी केस दर्ज करके बच्ची के घरवालों के तलाश में जुट गई है.

आज जब लड़कियां हर दौड़ में लड़कों को पीछे छोड़ आगे निकल रही हैं, देश का नाम रोशन कर रही हैं. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का आना हमारे लिए शर्म की बात है, जो दर्शाता है कि हम बेशक कितना भी आगे निकल जायें, पर अपनी संकीर्ण सोच से हमेशा ही पीछे रहेंगे.

Source: metro