मिसल पाव महाराष्ट्र की फ़ेमस डिश है. इसे देश के वेस्टर्न इलाके में लोग बड़े ही चाव से खाते हैं. मिसल पाव एक ऐसी डिश है जिसे नाश्ते से लेकर डिनर तक में खाया जा सकता है. पुणे के फ़ेमस शेफ़ विष्णु मनोहर ने रविवार(14 मार्च) को पूरे एक गांव को खिलाने के लिए मिसल बनाने का रिकॉर्ड बना डाला.

उन्होंने क़रीब 7000 किलो के महा मिसल बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. इस मिसल को बाद में ग़रीब और ज़रूरतमंदों में वितरित किया गया. चलिए विस्तार से इस अनोखे और टेस्टी रिकॉर्ड के बारे में भी जान लेते हैं.

7,000 kg of 'maha misal'
Source: indianexpress

मनोहर जी बताते हैं कि खाने से रिलेटेड कई रिकॉर्ड हज़ारों लोगों के नाम हैं. जैसे सबसे बड़ा पराठा, 5000 किलो की खिचड़ी, 4000 किलो का बैंगन का भर्ता. तो इन्होंने सोचा क्यों न वो भी कुछ साथियों के साथ मिलकर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम करें.

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'maha misal'
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इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र की फ़ेमस पकवान मिसल पाव को चुना. क़रीब 30 लोग पुणे के सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट में इकट्ठा हुए और क़रीब 3 घंटे में मनोहर जी के मार्गदर्शन में ये महा मिसल बना डाला. इसे बनाने में 1500 किलो अंकुरित दाल, 500 किलो प्याज़, 400 लीटर तेल, 250 किलो अदरक-लहसुन का पेस्ट, 180 किलो कांदा-लहसुन मसाला, 50 किलो मिर्च पाउडर, 50 किलो हल्दी पाउडर, 25 किलो नमक, 115 किलो नारियल पाउडर, 15 किलो तेजपत्ता, 1200 किलो फरसान(नमकीन), 4500 लीटर पानी और 50 किलो धनिया पत्ती का इस्तेमाल हुआ.

'maha misal'
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बनने के बाद इसे पुणे शहर में क़रीब 30,000 लोगों में बांटा गया. इस कार्य में 300 एनजीओ की हेल्प ली गई थी. इसे बनाने के लिए बाकायदा राज्य सरकार से अनुमति भी ली गई थी. कोरोना काल में बना ये संभवत: सबसे कम लोगों द्वारा बनाया गया महा फ़ूड है. 

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7,000 kg of 'maha misal'
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इंस्टीट्यूट के अधिकारियों ने बताया कि ये वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर छात्रों को ये सीख भी दी गई कि कैसे कम से कम समय में बड़े इवेंट को मैनेज किया जा सकता है.

आप इस शेफ़ के कारनामे से इंप्रेस हुए कि नहीं?