Shaheed Bhagat Singh Birth Anniversary 2021: शहीदे आज़म भगत सिंह अविभाजित भारत के लोगों और तमाम क्रांतिकारियों के आइडल रहे हैं और आज भी हैं. उन्होंने भारत को आज़ादी दिलाने के लिए 23 साल की उम्र में फ़ांसी के फ़ंदे पर झूलकर देश के लोगों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया था.

बहुत कम लोग हैं जो उनके अंतिम क्षणों के बारे में जानते हैं. भगत सिंह(Bhagat Singh) को जब फ़ांसी लगने वाली थी उस समय उनके मन में क्या चल रहा था और वो क्या कर रहे थे ये हर कोई जानने को उत्सुक रहता है. आज हमें ट्विटर पर एक थ्रेड मिला जिसे Last moments Of Bhagat Singh के शीर्षक के साथ शेयर किया गया है. इसमें भगत सिंह के अंतिम क्षणों के बारे में विस्तार से बताया गया है. 

ये भी पढ़ें: प्रेम को लेकर भी बहुत क्रांतिकारी थे भगत सिंह, सुखदेव को लिखी ये चिट्ठी इस बात का सबूत है 

अंतिम समय में पढ़ी थी इस क्रांतिकारी की बायोग्रॉफ़ी

Bhagat Singh Indian nationalist
Source: wikimedia

इसमें बताया गया है कि भगत सिंह को फ़ांसी पर चढ़ाए जाने से 2 घंटे पहले वक़ील प्राण नाथ मेहता उनसे मिलने में कामयाब हुए थे. उन्होंने भगत सिंह से मिलते समय उनको रूसी क्रांतिकारी Lenin की बायोग्रॉफ़ी दी थी. इसकी डिमांड भगत सिंह ने ख़ुद की थी. क़िताब के मिलते ही बिना कोई क्षण गंवाए वो उसे पढ़ने लगे क्योंकि वो जानते थे कि उनके पास ज़्यादा समय नहीं बचा है. वो पिंजरे में कै़द किसी बाघ की तरह जेल में टहलते हुए उसे पढ़ रहे थे. 

ये भी पढ़ें: क भगत सिंह ऐसा भी जिसके बारे में आप कुछ नहीं जानते 

देशवासियों को दिया ये संदेश 

Indian nationalist Bhagat Singh
Source: twitter

तभी प्राण नाथ ने उनसे कहा कि वो क्या कोई संदेश देशवासियों को देना चाहते हैं? इस पर भगत सिंह ने जवाब दिया- बस दो संदेश- 'साम्राज्यवाद को नीचे की ओर ले जाएं और क्रांति को लंबे समय तक जीवित रखें.'   

Bhagat Singh
Source: indiatvnews

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, अंतिम समय में भगत सिंह लाहौर की सेंट्रल जेल में क़ैद थे. वहां के वार्डन चरत सिंह ने उनसे आख़िरी समय में वाहेगुरू(ईश्वर) को याद करने को कहा. तब भगत सिंह ने कहा था- 'आपको नहीं लगता अब बहुत देर हो चुकी है.' 

भगत सिंह के अंतिम शब्द 

bhagat singh lahore jail

कुछ ही देर बाद फिर हवलदार आ गए और उन्हें पकड़कर फ़ांसी के तख्ते तक ले गए. फिर जब वो उनके गले में फंदा डालने लगे तब उन्होंने कहा-‘रूको जरा एक क्रांतिकारी दूसरे क्रांतिकारी से बात कर रहा है.’

bhagat singh jail
Source: wikimedia

भगत सिंह को आज लोग अपना आदर्श तो मानते है पर कोई उनके सिद्धांतों को समझना नहीं चाहता. बहुत कम लोग हैं जो उनकी बुक- 'मैं नास्तिक क्यों हूं', को पढ़ते हैं. वो उनके वामपंथी सिद्धांतों को भी नहीं समझना चाहते. 

भगत सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजली तो यही होगी कि देश नौजवान उनके बताए रास्तों पर चलें और देश को आगे ले जाने में जी-जान लगा दें.