माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपनी सुख-चैन कुर्बान कर देते हैं, ताकि उनके बच्चों को एक अच्छा भविष्य मिले. लेकिन बड़े और सफ़ल होकर वही बच्चे उन्हीं माता-पिता को घर से निकाल कर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं. मगर अब बिहार में ऐसा नहीं होगा. और अगर किसी बच्चे ने अपने पेरेंट्स को अकेला छोड़ दिया और उनकी सेवा नहीं की तो उसको जेल होगी.

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Newindianexpress में छपी ख़बर के अनुसार, बिहार में अब अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा न करने और उनको ठोकरें खाने के लिए छोड़ देने पर जेल भी जाना पड़ सकता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, बीते मंगलवार बिहार मंत्रीमंडल की एक बैठक हुई जिसमें ये फ़ैसला लिया गया कि बिहार में रहने बाले बच्चे अगर अब से अपने माता-पिता की सेवा नहीं करेंगे, तो उन्हें जेल की सज़ा हो सकती है. माता-पिता द्वारा ऐसी कोई भी शिकायत मिलते ही उनकी संतानों पर कार्रवाई की जायेगी.

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बिहार के सीएम, नीतीश कुमार की अध्यक्षता में ये कैबिनेट मीटिंग हुई थी, जिसमें 15 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई. बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि इस मीटिंग में जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी घटनाओं में शहीद बिहार के जवानों के आश्रितों को बिहार सरकार ने नौकरी देने का भी फ़ैसला किया गया है.

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इसके अलावा कैबिनेट की इस मीटिंग में राज्य की वृद्धजन पेंशन योजना को भी बिहार लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम 2011 के दायरे में लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई. अब किसी भी बुज़ुर्ग द्वारा दिए गए आवेदन का निपटारा प्रखंड विकास पदाधिकारी को 21 दिनों के अंदर करना होगा. वहीं एक अहम निर्णय ये भी लिया गया है कि भागलपुर में गंगा नदी पर एक नया पुल बनाया जाएगा.

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गौरतलब है कि पिछले साल मई में मोदी सरकार ने एक अहम फ़ैसला लिया था कि अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को बेसहारा छोड़ देने वाले बच्चों को कम से कम 6 महीने की जेल की सज़ा होगी. और अब बिहार कैबिनेट ने ये फ़ैसला लेकर एक बड़ा क़दम लिया है. पिछले साल के ही एक सर्वे में ये बात सामने आई थी कि हमारे देश में बुज़ुर्गों के खिलाफ़ अपराध के जितने मामले दर्ज होते हैं, असल में उनकी संख्या उससे कहीं ज़्यादा होती है.