नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) संजीव कुमार सिंह की बीते शुक्रवार को मृत्यु हो गई. 7 सालों तक एनआई के सदस्य रहे संजीव ने कई अहम योगदान दिए जिनके बारे में हमें शायद ही पता हो. 

ट्विटर पर @tuhinetweets नामक हैंडल से संजीव के बारे में कुछ ट्वीट्स किए गए, जिन्हें हर भारतीय को पढ़ना चाहिए.  

Source: Twitter

'संजीव कुमार सिंह ड्यूटी पर थे जब उन्होंने देखा कि एक स्टेट मिनिस्टर के बेटे ने एक लड़की पर अभद्र टिप्पणी की. संजीव ने भरी पब्लिक में उस लड़के को पीटा. ये हैं संजीव कुमार सिंह. बीते शुक्रवार को उनकी मृत्यु हो गई और मैं चाहती हूं कि आपको उनके जीवन के बारे में पता चले.'

'ये ट्विट्स किसी फ़िल्मी स्क्रीप्ट से लग सकते हैं पर ये हक़ीक़त है. संजीव कुमार सिंह ने एनआई में बेहद अहम भूमिका निभाई. संजीव ने पठानकोट अटैक की जांच को लीड किया और 26/11 के दोषियों का पता लगाया. वे एक आदर्श सिविल सर्वेन्ट थे.'

'एक बार उन्होंने झाड़ियों में गिरी एक लड़की मिली. फिर से बिना कुछ सोचे उन्होंने गाड़ी से उतरकर उसे बचाया. ये है उनकी बहादुरी. वो किसी और से कहकर ये करवा सकते थे और सारा श्रेय ख़ुद ले सकते थे. पर उन्होंने किसी की परवाह किए बग़ैर ख़ुद उसे बचाया.'

'उनके बेटे ने याद करते हुए बताया कि एक बार उसके पिता बहुत देर से घर पहुंचे और उन्हें याद आया कि उनके ड्राइवर के.पी.सिंह ने खाना नहीं किया था. उन्होंने के.पी.सिंह को बुलाया, दाल रोटी बनाई और खिलाया, इसके बाद वे सोने गए.'

'वे न सिर्फ़ एक नेक़ अफ़सर थे बल्कि सबसे फ़िट भी थे. मोदी जी के फ़िट इंडिया चैलेंज को एक्सेप्ट करके उन्होंने अपने वर्कआउट वीडियोज़ भी डाले जो वायरल हुए. उन्होंने ट्वीट करके लिखा था मैं संजीव कुमार 58+ हूं. अगर मैं कर सकता हूं तो आप भी कर सकते हैं.'

'उन्हें Sword of Honor से सम्मानित किया गया ता क्योंकि वे सबसे फ़िट IPS अफ़सर थे पर क़िस्मत को कुछ और मंज़ूर था और उनकी मृत्यु अचानक, वक़्त से काफ़ी पहले हो गई. मैं उनसे 2 हफ़्ते पहले ही मिली थी. उनकी पर्सनैलिटी ही अलग थी.'

'भोपाल में एक एरिया है संजीव नगर, जहां उन्होंने कई सालों तक अपनी सेवाएं दीं. उन्हें वहां लोग बेहद प्यार करते हैं और उनका काफ़ी सम्मान करते हैं. एक क्षेत्र का नाम उनके नाम पर रखने से उनकी लेगेसी हमेशा रहेगी'

'अब जब मैं उनके बारे में सोचती हूं तो मुझे एहसास होता है कि मैं उसी कमरे में बैठी हूं जहां वो शख़्स बैठा जिसे अपनी सेवाओं के लिए पद्मश्री मिलना चाहिए था पर वो आजीवन पर्दे के पीछे ही काम करता रहा, उस सिस्टम को सुधारने में लगा रहा जिसके बारे में हम अक्सर शिकायतें करते रहते हैं.'

'26/11 के दोषियों को उनके नेतृ्त्व में ढूंढा गया था, E-mail और Advance Software के ज़रिए और इनका इस्तेमाल पहली बार किया गया. विभिन्न पार्टियां भी उनका सम्मान करती थीं और उन्हें कई पार्टियों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं.'

'हम एक्टर और बिज़नेसमैन को ग्लोरिफ़ाई करते हैं और देश के असली हीरोज़ के बारे में बात नहीं करते. हम सभी जिस बदलाव का हिस्सा हैं, उस बदलाव को लाने पर काम करने वालों के बारे में बात नहीं करते. जो अपना काम पूरी तत्परता और ईमानदारी से करते हैं उन पर बात नहीं करते.'

तुहीना ने आगे लिखा कि संजीव अपने पीछे अपनी पत्नी और 2 बेटे छोड़कर गए हैं. ये सिर्फ़ एक परिवार की क्षति नहीं है पूरे देश की क्षति है. 

ये कहानी पढ़कर ट्विटर की प्रतिक्रिया-