वित्तीय संकट से जूझने के बाद जेट एयरवेज़ ने 18 अप्रैल को अपनी आख़िरी उड़ान भरी थी. इसके बाद कंपनी के 22 हज़ार कर्मचारी बेरोज़गार हो गए थे, जिसमें 16 हज़ार स्थाई जबकि 6 हज़ार कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी थे.

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जेट एयरवेज़ के 22 हज़ार कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से सैलरी भी नहीं मिल पायी है, इसी को लेकर ये कर्मचारी पिछली 21 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.

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अब जेट एयरवेज़ के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल ने बेरोज़गार हुए कर्मचारियों के नाम एक पत्र लिखा है. 6 मई को कंपनी के 26वीं सालगिरह के एक दिन बाद लिखे इस पत्र में गोयल ने कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे निरंतर सपोर्ट करने के लिए आप सभी का शुक्रिया.

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नरेश गोयल ने कहा कि जेट एयरवेज़ के कर्मचारियों को उनकी मेहनत की सैलरी नहीं मिल पाई, इसका मुझे मलाल है. ये मेरे और मेरी पत्नी के लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन समय है. कर्मचारियों के लिए वेतन के बिना जीवित रहना कितना मुश्किल होता है, ये मैं अच्छे से समझ सकता हूं.

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सभी कर्मचारियों और उनके परिवार वालों के लिए ये एक बेहद कठिन समय है. उनके दर्द को मैं शब्दों में भी बयां नहीं कर सकता. जो कर्मचारी एयरलाइन को बचाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं, मैं उन कर्मचारियों के प्रयासों को बारीकी से देख रहा हूं.

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नरेश गोयल ने एयरलाइन में अपने निजी कोष से 250 करोड़ रुपये देने की पेशकश भी की है, बैंकों को पैसा मिल सके ताकि बोली लगने तक बैंक एयरलाइन को नियंत्रित कर सके. हालांकि गोयल ने कर्मचारियों के साथ सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा, 'हमें 10 मई को सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है. बैंकों से संकटग्रस्त एयरलाइन के लिए बोली लगाने वाले को अंतिम रूप देने की उम्मीद है'.

अब भी जिन कर्मचारियों ने एयरलाइन को नहीं छोड़ा है, वो नरेश गोयल के पत्र से ख़ुश नहीं हैं-

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इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए एक वरिष्ठ विमान इंजीनियर ने कहा कि पिछले तीन महीनों में भ्रम की स्थिति से कोई राहत नहीं मिली है. नरेश गोयल का ये पत्र इस बात की पुष्टि करता है कि वो अब इस मसले से हमेशा के लिए दूरी बना लेंगे.

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वहीं जेट एयरवेज़ स्टाफ़ और ऑफ़िसर एसोसिएशन पहले ही जेट एयरवेज़ प्रबंधन सहित नरेश गोयल के ख़िलाफ़ उनकी सेवाओं के लिए सैलरी न दे पाने के लिए FIR की मांग कर चुके हैं. अब कंपनी ने कर्मचारियों को मेडिक्लेम जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया है.

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दरअसल, बैंकों ने जेट एयरवेज़ को वित्तीय सहायता देने से इंकार कर दिया था. कंपनी के पास उड़ानों के संचालन के लिए ज़रूरी कैश भी ख़त्म हो गया था. कंपनी पर 8 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज़ है और बैंकों ने 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फ़ंड देने से भी इंकार कर दिया.