देशभर में सर्दी का मौसम शुरू हो गया है ठंड बढ़ने के साथ ही अलमारी में पड़े गर्म कपड़े भी बाहर निकल आये हैं, लेकिन भारतीय जवान बॉर्डर पर पिछले 1 महीने से कड़क ठंड का सामना करते हुए चौबीसों घंटे देश सेवा में तैनात हैं.  

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बात जब लद्दाक (सियाचिन) की हो तो फिर ठंड का अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल होता है. भारतीय जवानों के लिए सियाचिन में काम करना सबसे मुश्किल टास्क होता है, लेकिन ये जवान अपनी जान की परवाह किए बग़ैर विपरीत से विपरीत परिस्तिथियों में जाकर देश सेवा करते हैं.  

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न्यूज़ एजेंसी ANI ने बुधवार को रक्षा सूत्रों के माध्यम से ली गई एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर की थी. इस तस्वीर में भारतीय सेना का एक जवान सफ़ेद ड्रेस पहने और हाथों में 'एसआईजी सॉयर असॉल्ट राइफ़ल' के साथ बॉर्डर पर तैनात नज़र आ रहा है. 

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ANI ने बताया कि, भारतीय सेना ने लद्दाक में चीनी सेना की घुसपैठ को रोकने के लिए भारी मात्रा में जवानों की तैनाती की है. इस दौरान जवानों के सामने चीन के साथ ही कड़ाके की ठंड से लड़ने की चुनौती भी है. ऐसे में सेना इससे निपटने के लिए जवानों को उचित ठिकाने और ठंड के कपड़े मुहैया करा रही है.  

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बीते मंगलवार को ही भारतीय सेना को अमेरिका से अत्यधिक ठंडे मौसम के कपड़ों का पहला बैच मिला था. इसके बाद सेना ने ये सभी कपड़े सियाचिन और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में तैनात जवानों के बीच वितरित कर दिए हैं.  

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बता दें कि सियाचिन और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र सहित पूरे लद्दाख क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए भारतीय सेना हर साल ठंड के कपड़ों के 60,000 सेट का स्टॉक रखती है. इस साल जवानों को अतिरिक्त 30,000 सेट की ज़रूरत थी, क्योंकि भारतीय सेना ने LAC पर चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए क़रीब 90,000 सैनिक तैनात किए हैं. 

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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा सचिव मार्क टी एस्पेर द्वारा दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हुई महत्वपूर्ण बैठक के एक दिन के बाद अमेरिका ने भारत को ये मदद पहुंचाई है. इस दौरान पोम्पियो ने कहा कि, 'अमेरिका किसी भी खतरे से निपटने के लिए भारत के साथ खड़ा है'.