हाल ही में एक 15 वर्षीय लड़की पिता को साइकिल पर बिठा कर 1200 किलोमीटर की यात्रा कर अपने गांव पहुंची. इस दौरान इस लड़की के बारे में जिसने जाना वो हैरान रह गया. कम उम्र में ज्योति कुमारी नामक इस लड़की ने जिस तरह का सराहनीय कार्य किया, वो वाकई क़ाबिले-ए-तारीफ़ था. तपती गर्मी में गुरुग्राम से बिहार तक पहुंचना कोई साधारण काम नहीं है. ज्योति के इसी साहस को देखते हुए उसे साइकिलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया से ऑफ़र आया है. 

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Source: thehillstimes

साइकिलिंग महासंघ द्वारा ज्योति को ट्रायल के लिये आंमत्रित किया गया है. साइकिलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन ओंकार सिंह ने पीटीई से बातचीत करते हुए कहा, 'अगर कक्षा 8 की छात्रा ज्योति कुमारी ट्रायल पास करती है, तो उसे IGI स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइकिलिंग अकादमी प्रशिक्षु के तौर पर सेलेक्ट किया जाएगा.' 

चेयरमैन का कहना है कि उन्होंने ज्योति से फ़ोन पर बात की और उसे बताया कि लॉकडाउन हटते ही अगले महीने उसे दिल्ली बुलाया जाएगा. यही नहीं, ज्योति की यात्रा से लेकर रहने-खाने तक का खर्च भी फ़ेडरेशन ही उठाएगा. इसके अलावा अगर वो किसी को घर से साथ लाना चाहती है, तो इसकी भी इज़ाज़त दी जाएगी. ओंकार सिंह ने कहा इसके लिये वो पहले राज्य इकाई बातचीत करेंगे और इसके बाद ज्योति को दिल्ली लाने की प्रक्रिया शुरू होगी. 

Girl who cycled 1200 km

ओंकार सिंह का मानना है कि 1200 किमी साइकिल चलाना आम बात नहीं है. इसके लिये ताकत और शारीरिक सहनशक्ति होनी चाहिये. उसका परीक्षण होना चाहिये. फ़ेडरेशन प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाना चाहता है. इस दौरान ज्योति को एक भी पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है. ज्योति के पिता कहना है कि उसे डर था कि गुरुग्राम में मकानमालिक जल्द ही उन्हें घर से बाहर कर देंगे. इसलिये उसने साइकिल से घर तक पहुंचने का निर्णय लिया. घायल पिता ने उसे समझाया कि उन्हें बस या ट्रेन नहीं मिलेगी. पर उसने हार नहीं मानी और कहा कि यात्रा करने के लिये बस उसे साइकिल चाहिये. 

जिस पिता की बेटी इतनी शक्तिशाली हो, उसके सामने परेशानियों का टिकना नामुमकिन है. 

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