उत्तर प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में चुनाव हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार में लगी हैं. तमाम आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं. इस बीच विपक्षी पार्टियों के कुछ बड़े नेता सरकार पर फ़ोन टैपिंग (Phone Tapping) का आरोप लगा रहे हैं. हालांकि, इस आरोप में कितनी सच्चाई है, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है. 

Phone Tapping
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मगर एक बड़ा सवाल ये है कि क्या सरकार के पास फ़ोन टैपिंग (Phone Tapping) अधिकार है?

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पहले जान लें फ़ोन टैपिंग (Phone Tapping) होती क्या है 

फोन टैपिंग का सीधा सा मतलब है कि दो लोगों की फ़ोन पर होने वाली आपसी बातचीत को किसी तीसरे शख़्स के द्वारा चोरी-छिपे सुना जाना. इसमें वो न सिर्फ़ आपकी इजाज़त के बिना बातचीत सुनता है, बल्कि उसको रिकॉर्ड भी कर लेता है.

तो क्या सरकार फ़ोन टैप कर सकती है?

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एक शब्द में इसका जवाब 'हां' है. सरकार के पास फ़ोन टैपिंग का अधिकार है. मगर ऐसा आम परिस्थियों में नहीं किया जा सकता है. दरअसल, देश का संविधान हर नागरिक को निजिता की सुरक्षा प्रदान करता है. लेकिन उसके साथ ही ख़ास स्थितियों में इसका उल्लंघन भी हो सकता है. मसलन, जब बात नेशनल और इंटर्नल सिक्योरिटी की हो. राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सरकार फ़ोन टैप कर सकती है. 

फ़ोन टैपिंग पर क्या कहता है भारतीय कानून (Phone Tapping Laws In India)

इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट 1885 के आर्टिकल 5 के सेक्शन (1) और (2) के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों को किसी के टेलीफ़ोन को इंटरसेप्ट करने का अधिकार है. हालांकि इस एक्ट में साल 2007 में संशोधन भी किया गया था. इसके तहत फ़ोन टैपिंग (Phone Tapping) के लिए सरकार को गृह सचिव स्तर के अधिकारी से परमिशन लेनी होती है. ये परमिशन 60 दिन की होती है. हालांकि, इसे बढ़ाकर 180 दिन तक किया जा सकता है.

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इसके अलावा, साल 2000 के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के अनुसार, फ़ोन्स की जासूसी करने या किसी भी कंप्यूटर में मौजूद या उससे भेजी गई किसी भी सूचना या डेटा को प्राप्त करने का अधिकार भी सरकार को है.

सरकार के लिए फ़ोन टैप कौन करता है? 

अब सवाल ये है कि सरकार के लिए ये काम कौन करता है? बता दें, केवल 10 एजेंसियों से ही फ़ोन टैप करवाया जा सकता है. ये एजेंसिया हैं - इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), रॉ (RAW), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस (SID) और दिल्ली पुलिस आयुक्त .