आसमान की ओर चलने की नाकाम कोशिश ने घुटनों पर ला दिया और रगड़ते घुटनों की परेशानियों ने सीधे चलना सिखा दिया. हर नवजात बच्चे का सफ़र कुछ यूं ही शुरू होता है. नन्हे कदमों से दूर तक छलांग लगाने कोशिश करते हैं. क्योंकि उन्हें पता होता है कि उन्हें थामने के लिए हर वक़्त मां मौजूद है. ‘मां’ जो एक एक बच्चे की शक्ति का केंद्र होती है. लेकिन जिस औलाद को वो हर वक़्त सहारा देने के लिए दिन-रात एक पैर पर खड़ी रहती है, उसे ही कुछ बच्चे सड़क पर बेसहारा छोड़ जाते हैं.

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तेलंगाना के भुवनगिरी जिले से भी एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक 75 वर्षीय महिला चाट मसाला गाड़ी के नीचे रहती हुई मिली. नालगोंडा जिले अधिकारियों लीगल सर्विस और लोकल एक्टिविस्ट की मदद से उन्हें बचाया गया. जिसके बाद पास ही हॉस्पिटल में उनके रहने की अस्थायी व्यवस्था की गई. इसके साथ ही उन्हें ज़रूरी इलाज भी दिया गया.

महिला का नाम Barla Kistamma बताया जा रहा है. पूछताछ में पता चला कि इस बुज़ुर्ग़ महिला को उसके परिवार ने भुवनागिरी बस स्टेशन पर छोड़ दिया था. वो Medchal जिले के Annojiguda में अपने छोटे बेटे कृष्णा के साथ रही थीं. इस उम्र में भी ये बुज़ुर्ग़ महिला दूसरे के घरों में काम करने को मजबूर थीं. जैसे-तैसे कुछ कमाई हो रही थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान वो भी बंद हो गया.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अधिकारियों ने उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क किया और उसे बुलाया. बाद में जब उनके बेटे और पोते ने वचन दिया कि वो उनका अच्छे से ख़याल रखेंगे, तब उन्हें साथ ले जाने दिया.

ये कोई एक वाक्या नहीं है. ऐसे बहुत से मामले सामने आते रहते हैं, जहां ख़ुदग़र्ज़ औलादें अपने मां-बाप को सड़क पर छोड़कर भाग जाते हैं. आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. यहां एक 80 साल की कोरोना पॉज़िटिव महिला को उनका बेटा बस स्टेशन पर छोड़कर चला गया.

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उनके बेटे ने उन्हें पानी लेने जाने का बहाना बनाकर बेंच पर बैठकर इंतज़ार करने को कहा और फिर वहां से भाग गया. बाद में यात्रियों ने उन्हें देखकर पुलिस को सूचना दी. जिसके बाद स्थानीय हेल्थ वर्कर्स ने उन्हें कोविड-19 ट्रीटमेंट के लिए आइसोलेशन फ़ैसिलिटी में शिफ़्ट किया.

पुलिस ने उनके बेटे को बुलाकर पूछताछ की तो पता चला कि उसे डर था कि मां के कोरोना संक्रमित होने के कारण परिवार के बाकी लोग भी इस वायरस की चपेट में आ जाएंगे. इसलिए उसने उन्हें बस स्टेशन पर छोड़ दिया.