सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुदर्शन न्यूज़ के ‘नौकरशाही जिहाद’ नाम के कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा ही है. उच्चतम न्यायालय का कहना है कि ये एक उन्माद पैदा करने वाला कार्यक्रम है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि हम एक पांच सदस्यों की कमेटी का गठन करने के भी पक्ष में हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ स्टैंडर्ड तय कर सके. 

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कोर्ट ने कहा, ‘कार्यक्रम में कई तथ्यात्मक गलतियां हैं. UPSC में मुस्लिम समुदाय की अपर एज लिमिट और वो कितनी बार परीक्षा दे सकते हैं, इसे लेकर ग़लत दावा किया गया. हमें लगता है कि कार्यक्रम के ज़रिए मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.' 

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 अगस्त को सुदर्शन न्यूज़ के उस कार्यक्रम पर रोक लगा दी थी, जिसमें चैनल के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके ने 'नौकरशाही में एक ख़ास समुदाय की बढ़ती घुसपैठ के पीछे कोई षडयंत्र होने' का दावा किया था. लेकिन केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ये कहते हुए इसे ऑन एयर करने की इजाज़त दे दी थी कार्यक्रम प्रसारित होने से पहले इसकी स्क्रिप्ट नहीं मांगी जा सकती और ना ही उसके प्रसारण पर रोक लगायी जा सकती है. जिसके बाद 11 और 14 सितंबर को इसके दो एपिसोड प्रसारित हुए. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक प्रोग्राम के प्रसारण पर रोक लगा दी है. 

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न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसफ़ की पीठ ने कार्यक्रम के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि, 'इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला ये कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है. इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने सेवाओं में घुसपैठ कर ली है और ये तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है.' 

वहीं, कोर्ट ने सुदर्शन टीवी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा कि, 'आपका क्लाइंट देश का अहित कर रहा है और ये स्वीकार नहीं कर रहा कि भारत विविधता भरी संस्कृति वाला देश है. आपके क्लाइंट को अपनी स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए.'