हाल ही में नासा के Jet Propulsion Laboratory (JPL) के दो रिसर्चर्स ने एक बेहतरीन घोषणा की. उन्होंने बताया कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से इकठ्ठा किये गए नमूनों में बैक्टीरिया की एक नयी प्रजाति की खोज की है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि नए बैक्टेरिया की ये प्रजाति अंतरिक्ष के मिशनों में हमारी काफ़ी मदद कर सकती है. 

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नासा के साथ काम कर रहे हैदराबाद विश्वविद्यालय के रिसर्चर्स कस्तूरी वेंकटेश्वरन और नितिन कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें कुल 4 बैक्टीरिया मिले हैं. ये बैक्टीरिया Methylobacteriaceae परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. इन चारों बैक्टीरिया में से एक बैटीरिया, जिसका नाम Methylorubrum rhodesianum है, की खोज पहले हो चुकी है, बाक़ी तीन बैक्टीरिया बिलकुल नए हैं. दोनों रिसर्चर्स इस नए बैक्टीरिया का नाम भारत के भारतीय जैव विविधता वैज्ञानिक डॉ. अजमल ख़ान के नाम पर Methylorubrum ajmalii रखे जाने की बात चल रही है.

इस खोज से क्या मदद मिलेगी?

अंतरिक्ष स्टेशन से मिला ये नया बैक्टीरिया पौधे के विकास के साथ-साथ पौधों के रोग से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, यह बैक्टीरिया अंतरिक्ष में फसल उगाने में मदद कर सकता है. हालांकि इस बारे में अभी शोध करन बाकी है मगर ये बात सच साबित होती है तो इस बैक्टीरिया की सहायता से मंगल ग्रह में फसल उगाने पर भी रिसर्च की जाएगी. 

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अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन क्या है?

जिन लोगों को अंतरिक्ष में दिलचस्पी होगी वो इसके बारे में ज़रूर जानते होंगे मगर आप उन लोगों में हैं जिन्हें नहीं मालूम उन्हें बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station) एक बहुत बड़ा अंतरिक्ष यान है. यह पृथ्वी की परिक्रमा करता है. एक ऐसा स्टेशन है जहां अंतरिक्ष यात्री रहते हैं. इस स्टेशन में इंसानों के रहने के लिए सभी ज़रूरी सुविधाएं मौजूद हैं. इसके साथ ही यह एक विज्ञान प्रयोगशाला भी है. 

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इस स्टेशन को कई सारी स्पेस एजेन्सीज़ ने मिलकर बनाया है. इसे बनाने में अमेरिका की नासा के साथ रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी (आरकेए), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने मदद की है. इनके अलावा ब्राजीलियन स्पेस एजेंसी (एईबी) भी कुछ नासा के साथ कार्यरत है.

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अब ये तो रिसर्च ही बता पाएगी कि ये बैक्टीरिया इंसानों की कितना मदद कर पायेगा मगर अभी इस पर काफी उम्मीदें हैं.