इस देश में लोगों को नेता बनने का बड़ा शौक है. हर चौराहे-नुक्कड़ पर फ़र्ज़ी की नेतागीरी झाड़ते लोग दिख जाएंगे. ये बीमारी सिर्फ़ मोहल्ले और कॉलोनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी-बड़ी हाउसिंग सोसाइटी तक फैली है. बस फ़र्क़ इतना है कि यहां नेता की भूमिका में सफ़ेद पैंट-शर्ट पहने कोई लखैरा नहीं बल्कि रेज़िडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन के अति ज़िम्मेदार सदस्य होते हैं.

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जी हां, ये एसोसिएशन बिना सोचे-समझे कुछ भी निर्देश जारी कर देते हैं, जिसकी वजह से हाउसिंग सोसाइटी में रहने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है. 

ये निर्देश कितने अजीब हैं, उसका ये नमूना देखिए. ‘अनुरोध है कि अगले दो हफ़्तों तक सख़्त क्वारंटीन का पालन किया जाए और बाहर से कोई सामान घर पर ना लाएं – दूध, ब्रेड, सब्ज़ियां कुछ भी नहीं. प्लीज़. वायरस को घर पर बुलाने से बेहतर पानी के साथ नमक-अजवाइन की रोटी है. प्लीज़ कॉपरेट करें.’

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इतना ही नहीं, आगे ये एसोसिएशन डॉक्टर भी बन जाते हैं. ‘स्टीम इनहेलेशन लें, गर्म पानी से तीन-चार बार गरारा, भले ही गले में ज़्यादा जलन न भी लगे. मौसम बदल रहा है. सर्दी-ख़ांसी की शिकायत हो सकती है. घबराएं नहीं. सर्दी-बुख़ार मौसमी हो सकता है. अगर इन लक्षणों के साथ तेज़ बुख़ार हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें. ईश्वर हम सभी पर कृपा करें.’

ऐसे में इन आदेशों के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने आखिरकार इन रेज़िडेंट बॉडीज़ के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का फ़ैसला किया है. लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है, जब इस तरह के निर्देश RWA की तरफ़ से आए हों. पहले भी ऐसे ही बेमतलब के मैसेज इन बॉडीज़ की तरफ़ से जारी होते रहे हैं.

1. सोसाइटी में न्यूज़पेपर आना मना है, क्योंकि इससे कोरोना वायरस फैल सकता है.

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2. डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि बाज़ार में उपलब्ध सभी डेयरी उत्पाद और हरी सब्जियां कोरोना वायरस फैलाती हैं, इसलिए इन उत्पादों को सोसाइटी में लाना मना है.

3. 'वन मेड, वन हाउस' की पॉलिसी के तहत हाउस हेल्प की अनुमति है, लेकिन वो सिर्फ़ एक घर में काम कर सकती है. दो घरों में अगर काम करना है, तो वैकल्पिक दिन पर इसे किया जा सकता है. 

4. हाउस हेल्प की अनुमति है लेकिन नियोक्ता को एक अंडरटेकिंग देना होगा कि अगर घर कोविड-19 फैलता है तो वे ज़िम्मेदार होंगे. 

5. हाउस हेल्प की अनुमति है, लेकिन सोमवार, बुधवार और शनिवार को सुबह 8 से 10 बजे के बीच. यदि उनके पास आरोग्य सेतु ऐप नहीं है, तो उन्हें अनुमति नहीं दी जाएगी.

6. रेज़िडेंट कोविड-19 के लिए अपने घरेलू कर्मचारियों का परीक्षण करवाएं और रिपोर्ट पेश करें.

7. पानी बचाने के लिए दिन में 3 बजे से 6 बजे और रात में 12 बजे से सुबह 5 बजे तक पानी की सप्लाई रोक दी गई. 

8. एक सोसाइटी में काले कुत्ते के आने पर शगुन-अपशगुन को लोग आपस में भिड़ गए. ऐसे में वोटिंग के ज़रिए डिसाइड हुआ कि अपार्टमेंट फ़ंड में से पुजारी को बुलाकर पूजा कराई जाएगी, ताकि किसी तरह के अपशगुन को रोका जा सके. 

9. निवासियों को क्लॉक वाइस चलने के लिए निर्देश दिए गए. इसके साथ ही उनकी प्राइवेसी की धज़्ज़ियां उड़ाते हुए बताया गया कि उन पर कैमरे की नज़र है, अगर वो मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करेंगे, तो 500 रुपये का जुर्माना मेनटेनेंस बिल के साथ भेजा जाएगा. 

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10. लोगों को पार्क में टहलने और कॉमन एरिया में खड़े होने से रोक दिया गया. पार्क के बेंचों को कांटेदार तारों से ढक दिया गया, ताकि उन पर कोई बैठ न सके. 

11. कर्मचारी कॉलोनी में नहीं खा सकते हैं. उन्हें कॉलोनी के बाहर जाकर खाना खाना चाहिए.

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12. कर्मचारी मोटरसाइकिल या साइकिल को गेट के अंदर चलाकर नहीं ला सकते हैं. उन्हें गेट के बाहर की गाड़ी को रोकना होगा और खींचकर ही अंदर लाना होगा. 

13. डोमेस्टिक हेल्प के किसी भी बच्चे को कॉलोनी में किसी भी पार्क / हरे स्थान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.

14. निवासियों में से किसी को भी चार पहिया वाहनों को सोसाइटी से बाहर ले जाने की इजाज़त नहीं है. सिर्फ़ आवश्यक सेवाओं की लिस्ट में आने वाली कंपनियों की गाड़ियां ही बाहर जा सकती है. ऐसे में लोगों को पैदल ही मार्केट से जाकर सामान ख़रीदने पर मजबूर होना पड़ा.

15. निवासियों को सिर्फ़ सुबह 6 से 9 बजे तक ही बाहर निकलने की इजाज़त है. उसके बाद सबको घर पर ही रहना पड़ेगा. इसके साथ ही कुछ जगह तो RWA ने डेयरी और सब्ज़ियों की दुकानों को भी बंद कर दिया. 

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बता दें, नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे हर जगह RWA की यही रवैया है. यही वजह है कि गौतमबुद्ध नगर प्रशासन और नोएडा पुलिस ने अब इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का मन बना लिया है. 

पुलिस आयुक्त आलोक सिंह ने भी कहा कि सभी RWA और AOA के लिए गाइडलाइंस जारी की जा रही हैं. ‘वे निवासियों पर अजीब नियम नहीं थोप सकते. मैंने अधिकारियों से ऐसे सभी एसोसिएशन्स पर लगातार नज़र रखने को कहा है. यदि उन्हें अनावश्यक प्रतिबंध लगाने का दोषी पाया जाता है, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी.’