ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर इस वक़्त इस्तीफ़े की तलवार लटक रही है. कोविड महामारी के दौरान शराब पार्टी को लेकर उनकी जमकर आलोचना हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि अगर बोरिस जॉनसन से इस्तीफ़ा दिया, तो ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री (British Prime Minister) के तौर पर भारतीय मूल के ऋषि सुनक (Rishi Sunak) का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर है. 

Rishi Sunak
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ब्रिटेन में एक प्रमुख सट्टा कंपनी 'बेटफेयर' ने ये दावा किया है कि बोरिस जॉनसन पर विपक्ष के साथ ख़ुद उनकी कंज़रवेटिव पार्टी का भी इस्तीफ़े को लेकर दबाव है. ऐसे में उनके बाद ऋषि सुनक देश के अगले पीएम हो सकते हैं. तो आइए जानते हैं कौन हैं ऋषि सुनक (Rishi Sunak) और क्यों इन्हें बताया जा रहा है ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का प्रबल दावेदार?

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कौन हैं ऋषि सुनक (Rishi Sunak)?

ऋषि सुनक मूल रूप से भारत के पंजाब से ताल्लुक रखते हैं. उनके दादा-दादी का जन्म पंजाब में हुआ था. वो 60 के दशक में पूर्वी अफ़्रीका से ब्रिटेन चले गए. उनके पिता यशवीर ब्रिटेन में ही डॉक्टर थे. जबकि, मां ऊषा सुनक एक लोकल फ़ॉर्मेसी चलाती हैं. 

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ऋषि का जन्म 2 मई 1980 को साउथेम्प्टन, हैम्पशायर, इंग्लैंड में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई विनचेस्टर कॉलेज से की, जिसके बाद वो ऑक्सफोर्ड चले गए. यहां उन्होंने राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की. फिर स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से उन्होंने एमबीए किया. 

Akshata Murthy
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ऋषि सुनक (Rishi Sunak) के बारे में एक दिलचस्प बात ये भी है कि वो भारतीय आईटी कंपनी Infosys के फाउंडर नारायण मूर्ति (Narayan Murhthy) के दामाद हैं. दरअसल, स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अक्षता मूर्ति से हुई थी. दोनों में प्यार हुआ और फिर साल 2009 में दोनों ने शादी कर ली.

ऋषि सूनक (Rishi Sunak) का राजनीतिक करियर

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से निकलने के बाद ऋषि ने कई बड़ी कंपनियों में नौकरी की. मगर फिर उन्होंने राजनीति के तरफ़ रूख किया. इसकी शुरुआत साल 2014 से हुई. कंज़रवेटिव पार्टी की ओर से उन्हें रिचमंड सीट पर प्रत्याशी बनाया गया और 2015 में वो इसी सीट से जीतकर सांसद बन गए. 

साल 2016 में जब Brexit यानि ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने की बात हुई, तो इसके समर्थक और विरोधी दोनों थे. ऋषि Brexit के समर्थकों में से एक थे. ये एक प्रमुख वजह थी कि वो बोरिस जॉनसन के क़रीबियों में गिने जाने लगे. जब साल 2019 में जॉनसन फिर प्रधानमंत्री बने, तो ऋषि को चीफ़ सेक्रेटरी ऑफ़ द ट्रेज़री बनाया. वहीं, 2020 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री पाकिस्तानी मूल के साजिद जावेद ने इस्तीफ़ा दिया, तो ये पद ऋषि को मिल गया. तब से वो इसी पद पर काम कर रहे हैं. 

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बता दें, ऋषि सुनक भले ही ब्रिटेन में पैदा हुए, मगर वो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं. इसका सुबूत साल 2017 में तब मिला, जब उन्होंने दूसरी बार सांसद बनने पर ब्रिटेन की संसद में भागवद्गगीता पर हाथ रख कर शपथ ली थी.

क्यों है ऋषि सुनक पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार?

ऋषि अपने पहले ही बजट से लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए थे. उन्होंने कोरोना वायरस से निपटने के लिए 12 बिलियन पाउंड की सरकारी मदद की घोषणा की थी. साथ ही, उन्होंने देश के हर तबके को ये भरोसा दिलाया था कि सरकार किसी को भी भूली नहीं है और वो सबकी मदद करेगी. 

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उन्होंने कहा था कि 'ये वक़्त किसी विचारधारा या रूढ़िवादिता का नहीं है. ये समय साहस दिखाने कहा है. लोगों की नौकरियों और आय को सपोर्ट करने के लिए जो कुछ करना होगा, वो हम करेंगे.'

जिस तरह की सहानुभूति उन्होंने लोगों के लिए दिखाई, उसने ऋषि को आम जन में काफ़ी पॉपुलर बना दिया. 2021 में YouGov नाम की एक मार्केटिंग रिसर्च कंपनी के सर्वे में ऋषि सुनक को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से ज़्यादा लोकप्रिय बताया गया था. 

यही वजह है कि माना जा रहा है कि अगर बोरिस का इस्तीफ़ा हुआ, तो ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री ऋषि हो सकते हैं.