पवित्र और आस्था से जुड़ी होने के बावजूद आज देश में गंगा नदी किन हालातों से गुज़र रही है, वो किसी से छिपा नहीं है. देश के विकास के नाम पर आये दिन पवित्र गंगा प्रदूषण का शिकार हो रही है. हर चुनाव के बाद एक नई सरकार आती है और 'नमामि गंगे' जैसे बोर्ड को स्थापित कर 'गंगा स्वच्छता अभियान' की बात करती है, पर पांच साल बाद भी गंगा अपने अस्तित्व की लड़ाई करती हुई ही दिखाई देती है.

बेशक इस मुद्दे पर सरकार के गंभीर दावे कभी गंभीर न दिखाई दिए हो, पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मुद्दे को गंभीरता के साथ लिया है. गुरुवार को हुई बैठक में NGT ने हरिद्वार से लेकर उन्नाव तक गंगा के आस-पास 100 मीटर के दायरे को 'No-Development Zone’ कहा है. NGT के इस फ़ैसले के बाद यहां गंगा किनारे किसी भी तरह के निर्माण कार्य को नहीं किया जायेगा.

इसके साथ ही गंगा को किसी भी तरह से प्रदूषित करने वालों के ख़िलाफ़ 50 हज़ार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान किया है. अपने फ़ैसले में NGT ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो 6 हफ़्ते के अंदर गंगा के किनारे बनी फैक्टरियों को हटाए.

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