एथलेटिक वस्त्रों और जूतों का सबसे बड़ा उत्पादक 'Nike', देश-दुनिया के सबसे लोकप्रिय Brands में से एक है. Nike का महशूर Logo सन् 1971 में Portland State University के छात्र, Carolyn Davidson ने महज़ 35 Dollar में डिज़ाइन किया था. Swoosh Logo और 'Just Do It' का नारा देकर Nike, विश्व भर में अपनी अलग पहचान बना चुका है. इस ब्रांड से जुड़ी ये बातें तो लगभग हर कोई जानता है. लेकिन आज हम आपको इस ब्रांड से जुड़े एक ऐसे सच के बार में बताते हैं, जिसको जानने के बाद अच्छों-अच्छों की रूह कांप जाए.

कभी सोचा है कि कंपनी को 'Just Do It' का आईडिया कहां और कैसे आया, नहीं न. दरअसल, एडवरटाइज़िंग एज़ेंसी Wieden+Kennedy के को-फ़ाउंडर Dan Wieden ने Deezen Magazine को दिए इंटरव्यू में चौंका देने वाला ख़ुलासा करते हुए बताया, ''Just Do It' का नारा एक मर्डर से प्ररित है. घटना 1977 की है. Gary Gilmore नामक हत्यारे ने Portland के Utah में कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. वहीं फ़ायरिंग टीम ने कई लोगों को मौत की सज़ा सुना, उन्हें जेल भेज दिया गया.'

Wieden आगे बताते हैं, 'जेल में बंद एक शख़्स से फ़ायरिंग टीम ने पूछा कि तुम मरने से पहले कुछ कहना चाहते हो, तो उस शख़्स का जवाब था 'Let's do this'. वहीं कंपनी को टैगलाइन देते वक़्त मुझे उस शख़्स के अंतिम शब्द याद आ गए, लेकिन मुझे 'Let's do this' पसंद नहीं आया, तो मैंने इसे बदल कर 'Just do it' कर दिया और देखते ही देखते इस नारे ने कंपनी को बहुप्रसिद्ध कर दिया.'

वाकई 'Nike' की सफ़लता का राज़ बेहद रोचक है. ये तो साबित हो गया कि हर सफ़ल चीज़ के पीछे एक कड़वा सच ज़रूर छिपा होता है.