10 जुलाई, निकोला टेस्ला का दिन!

10 जुलाई, 1856 को निकोला टेस्ला का जन्म एक रूढ़ीवादी परिवार में हुआ. पिता की चाहत थी कि बेटा भी उनकी तरह एक पादरी बने. लेकिन बेटे का दिमाग़ विज्ञान की ओर भागता था. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर टेस्ला काम की तलाश में 1884 अमेरिका चले गए.

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वहां उन्होेंने महान अविष्कारक थॉमस एडिसन की कंपनी में काम करना शुरू कर दिया. उस वक़्त थॉमस एडिशन का नाम अमिरका की जानी-मानी हस्ती के तौर पर लिया जाता था. एडिसन ने बल्ब और डीसी करंट की ख़ोज कर दी थी. एडिसन की कंपनी बड़े-बड़े उद्योग कारख़ानों को बिजली बेचा करती थी. पूरी दुनिया एडिसन के इस अविष्कार की मूरीद थी लेकिन टेस्ला उनमें से एक नहीं थे. टेस्ला का मानना था कि डीसी करेंट बहुत उपयोगी नहीं है और बहुत ख़र्चीला है. इसके बदले AC करेंट को बढ़ावा दिया जाए, तो वो ज़्यादा लाभदायक होगा. हालांकि एडिसन AC करेंट को ख़तरनाक मानते थे.

एडिसन बनाम टेस्ला

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एक बार कंपनी के मैनेजर ने टेस्ला के सामने एक मोटर से जुड़ी किसी समस्या को रखा और कहा कि अगर वो इसका समाधान निकाल ले आएं, तो उन्हें 50 हज़ार डॉलर ईनाम में दिए जाएंगे. टेस्ला ने रात-दिन एक कर उस समस्या को सुलझा लिया. जब वो अपने ईनाम के लिए मैनेजर के पास गए, तो मैनेजर ने अपनी बात को मज़ाक कह कर पैसे देने से मना कर दिया. इस घटना के बाद से टेस्ला का एडिसन की कंपनी से मन उचट गया और उन्होंने वहां काम करना छोड़ दिया.

इसके बाद वो AC करेंट के कॉन्सेप्ट को विकसित करने में लग गए. कुछ दिनों बाद उन्हें इन्वेस्टर भी मिल गया, जो उनके काम पर पैसा लगाने के लिए तैयार हो गया. यहां से एडिसन और टेस्ला के बीच जंग की शुरुआत हो गई. इतिहास में इस अध्याय को War Of Current के नाम से भी जाना जाता है.

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टेस्ला का AC करेंट तुरंत लोगों तक पहुंचने लगा. टेस्ला की ख़्याति बढ़ने लगी. ये बात एडिसन को पसंद नहीं आ रही थी. एडिसन ने AC करेंट को बदनाम करने की पूरी कोशिश कर डाली. यहां तक कि AC करेंट को ख़तरनाक साबित करने के लिए अमेरिका में पहली बार Electriciy Chair द्वारा मौत की सज़ा दी गई और इसके लिए AC करेंट का इस्तेमाल किया गया. इन सब के बावजूद टेस्ला का AC करेंट चल निकला.

टेस्ला- एक अंडररेटड वैज्ञानिक

दुनिया वर्तमान में जिस बिजली के रूप को इस्तेमाल करती है, उसका ईजाद टेस्ला ने किया था. लेकिन Father Of Electricity थोमस एडिसन को कहा जाता है. सिर्फ़ बिजली की बात ही नहीं, टेस्ला के आविष्कारों को विज्ञान जगत ने मुनासिब क्रेडिट नहीं दिया. जब दुनिया संचार के बारे में ज़्यादा सोच भी नहीं रही थी, तब टेस्ला वायरलेस संचार की बात कर रहे थे. यानी उनकी सोच अपने समय से लगभग 100 साल आगे थी. अपने अंतिम दिनों में वो दुनिया के लिए मुफ़्त बिजली की परियोजना पर काम कर रहे थे लेकिन बदकिस्मती से वो उसे पूरा नहीं कर पाए. उनके लिखे नोट्स से पता चलता है कि वो सफ़लता के काफ़ी करीब थे.

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दुनिया का पहला Hydroelectric Water Plant बनाने का श्रेय भी निकोला टेस्ला को जाता है. 1895 में उन्होंने सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध नाईग्रा फॉल पर Hydroelectric Water Plant स्थापित किया. ऐडिसन भी ऐसा करना चाहते थे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

टेस्ला को 8 भाषाओं का ज्ञान था- Serbo-Croatian, Czech, English, French, German, Hungarian, Italian and Latin. उनकी याददाश्त भी बहुत अच्छी थी, किताब पढ़ने के बाद उसे शब्दश: याद रख पाते थे. किसी प्रोजेक्ट पर काम करने से पहले से ही उसका अंतिम रूप उनके दिमाग़ में तैयार रहता था. इस वजह से उनके लिखे बहुत कम नोट्स ही मिल पाते हैं.

टेस्ला ने विज्ञान के लिए सबकुछ न्योछावर कर दिया था. कहा जाता है कि उन्होंने ज़िंदगीभर किसी लड़की को डेट नहीं किया. उनका मानना था कि इससे उनकी काम की एकाग्रता भंग होगी. जीवन के अंतिम समय में वो बिल्कुल अकेले थे. अपने अकेलेपन के साथ ही वो 7 जनवरी, 1943 को इस दुनिया को छोड़ गए. आज भी विज्ञान जगत जिसके काम का पूरा-पूरा आभार प्रकट नहीं कर सका है. वो इंसान जिसने, अपना जीवन विज्ञान को भेंट में दे दिया. आज का मॉर्डन इंसान टेस्ला का कर्ज़दार है. कहा जाता है कि टेस्ला अपने वक्त के आगे व्यक्ति थे. अगर निकोला टेस्ला अपने वक्त से आगे नहीं रहते, तो ये दुनिया अभी बहुत पीछे रहती.