न्यूज़ चैनल पर अब भी भले ही पाकिस्तानी आतंकियों और मंदिर से स्वर्ग की सीढ़ियों पर ढूंढा जा रहा हो, पर सोशल मीडिया पर बीते दो दिनों से बस डायमंड मर्चेंट नीरव मोदी की सुर्ख़ियों में छाये हुए हैं. वही नीरव मोदी, जिसे फ़ोर्ब्स ने 2013 में इंडियन अरबपति की लिस्ट में शामिल किया और तब से लेकर आज तक वो अपनी जगह बनाए हुए है. हालांकि इस बार नीरव मोदी के सुर्ख़ियों की वजह कोई नया स्टोर या कोई नया ज्वेलरी डिज़ाइन नहीं, बल्कि पंजाब नेशनल बैंक को 11,360 करोड़ रुपये का घोटाला पहुंचाना है.

ख़बरों के मुताबिक, पिछले महीने जांच एजेंसी द्वारा नीरव मोदी की कंपनी ग्लोबल डायमंड ज्वेलरी हाउस के कई ठिकानों पर छापेमारी की गई. नीरव और उसकी कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब नैशनल बैंक को कथित तौर पर 280 करोड़ रुपये से ज़्यादा की चपत लगाई. इस घोटाले को बैंकिंग सेक्टर का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है.

इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट की माने, तो इस घोटाले से सिर्फ़ पंजाब नेशनल बैंक के अलावा अलाहाबाद, एक्सिस और यूनियन बैंक जैसे 6 बड़े बैंक्स के नाम भी शामिल हैं. इसके साथ ही ये रिपोर्ट कहती है कि इन बैंक्स से लेन-देन करने के लिए नीरव ने बैंक अधिकारियों के साथ मिल कर PNB के लेटर का इस्तेमाल किया.

कौन है नीरव मोदी?

नीरव मोदी और विकिपीडिया पर दी गई जानकारी के मुताबिक, नीरव के पिता और दादा बेल्जियम के एक मशहूर हीरा व्यापारी हैं. शुरूआती उम्र से ही नीरव का झुकाव कला और डिज़ाइन की तरफ़ था, जिसके बाद वो यूरोप और दुनिया के अलग-अलग म्युज़ियम्स में घूमने लगा.

आर्ट और डिज़ाइन में अपनी दिलचस्पी को उसने अपने बिज़नेस से जोड़ा और डायमंड बिज़नेस के सभी गुर सीखने के बाद वो हिंदुस्तान में बस गया. साल 1999 में उसने Nirav Modi नाम से एक कंपनी की नींव रखी, जिसकी डिज़ाइनर ज्वेलरी थोड़े ही समय में काफ़ी पॉपुलर होने लगी. इसके स्टोर्स लंदन, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, बीजिंग और मकाऊ जैसी जगहों पर खुलने लगे.

नीरव ज्वेलरी के चाहने वालों में केट विंस्लेट, कोको रोशा, लीज़ा हेडन और एश्वर्य राय जैसे नाम शामिल हैं, जबकि प्रियंका चोपड़ा इसकी ब्रांड अम्बेस्डर हैं.

कब सामने आई घोटाले की सच्चाई?

2011 में नीरव मोदी और उनके साथियों ने बिना तराशे हुए हीरों का आयात करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क साधा. इस तरह की लेन-देन के लिए बैंक की तरफ़ से LoU (लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग) जारी किया जाता है. इसके तहत बैंक विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करता है, जिसका पैसा बाद में नीरव को चुकाना था. लेकिन मोदी ने बैंक के कुछ कर्मचारियों से सांठ-गांठ करके फ़र्ज़ी LoU जारी करवाए और इन्हीं फ़र्ज़ी LoU के आधार पर दूसरे बैंकों से लोन लिया.

ये स्कैम कोई एक या दो साल के अंदर नहीं हुआ है, बल्कि पिछले सात सालों से फ़र्ज़ी LoU के आधार पर ये खेल बैंक की नाक के नीचे खेला जा रहा था.

ये सारा खेल उस समय सामने आया, जब पंजाब नेशनल बैंक के भ्रष्ट अधिकारी रिटायर होने लगे और नए कर्मचारी मोदी की कंपनी का लेन-देन देखने लगे. शुरुआत में नए अधिकारियों की समझ में नहीं आया कि आखिर इतने बड़े अमाउंट के साथ ऐसी भूल कैसे हो सकती है? उन्होंने इसकी जांच के लिए आंतरिक कमिटी बनाई, जिसके बाद सारा खेल साफ़ हो गया.

जांच पूरी होने के बाद पंजाब नेशनल बैंक ने 14 फ़रवरी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को इस फ़र्ज़ीवाड़े की जानकारी दी, जिसके बाद ये सारा खेल मीडिया की नज़र में आया.

क्या कहता है बैंक?

बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक का कहना है कि 'इस घोटाले में हुए लेन-देन के ज़रिये कुछ ख़ास लोगों को फ़ायदा पहुंचाया गया है, जिसमें बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत है.'

हालांकि उसने अभी संलिप्त लोगों के नामों का खुलासा नहीं किया है. लेकिन ये ज़रूर कहा है कि इस धोखाधड़ी की सूचना सेबी (SEBI) समेत सीबीआई को दे दी है, जो मामले की जांच कर रही है.

हालांकि इस सब के बीच एक ख़बर ये भी है कि नीरव देश छोड़ कर भागने में कामयाब हो गए हैं.