ये तस्वीर कुछ लोगों को अद्भुत, तो कुछ लोगों को अश्लील लगी. इसे अश्लील करार देने वाले लोग ये दलीलें दे रहे थे कि मां आंचल में छिपाकर बच्चे को दूध पिलाती है.

कहते हैं दुनिया का सबसे बड़ा करिश्मा है, बच्चे को जन्म देती मां. मां जब बच्चे को दूध पिलाती है, इसे हम सबसे पवित्र एहसास मानते हैं. लेकिन जब इसी एहसास को तस्वीर के ज़रिए दर्शाने की कोशिश की गई, तो उसे अश्लीलता क़रार दिया गया.

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कुछ लोगों को ख़ूबसूरत तो कुछ लोगों को अश्लील लगी थी. मलयालम पत्रिका 'गृहलक्ष्मी' ने अपने मार्च 2018 के अंक के कवर पर ये तस्वीर छापी थी.

तस्वीर से ख़फ़ा होकर Felix MA ने पत्रिका पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाते हुए केरल हाई कोर्ट में अर्ज़ी डाल दी थी.

The News Minute में छपी रिपोर्ट के अनुसार, Felix MA ने आरोप लगाया था कि पत्रिका, Juvenile Justice Act के Section 45(Protection of Children From Sexual Offences Act and Rules) का उल्लंघन करती है. Felix MA ने ये भी कहा कि पत्रिका ने Indecent Representation of Women(Prohibition Act), 1986 और भारत के संविधान के Article(e) और (f) का भी उल्लंघन किया है.

केरल हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए Ruling जारी की,

तस्वीर का बैकग्राउंड और उसमें महिला जिस तरह से बैठी है और शिशु को दूध पिला रही है, वो अश्लील तो दूर, इस शब्द के आस-पास भी नहीं है. हम दायर की गई याचिक का खारिज करते हैं.

Justice Antony Dominic और Justice Dama Seshadri Naidu ने याचिका जारी करते हुए ये भी कहा,

हमने तस्वीर को अच्छे से देखा लेकिन हमें इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला. हमने तस्वीर को उन्हीं नज़रों से देखा, जिन नज़रों से हम राजा रवि वर्मा की चित्रकारियों को देखते हैं. जैसे ख़ूबसूरती देखने वाले की आंखों में होती है, वैसे ही अश्लीलता भी.

Felix MA के अलावा अलुवा के एक वक़ील, जियास जमाल ने State Child Rights Commission ने गृहलक्ष्मी के प्रेशकों और तस्वीर में दिखाए गई मॉडल Gilu और बच्चे के माता-पिता के खिलाफ़ शिकायत दर्ज की थी.

पता नहीं कब तक हम बिना मतलब की बातों को मुद्दा बनाते रहेंगे और असल मुद्दों से भटकते रहेंगे. महिला सुरक्षा एक अहम मुद्दा है और हम अभी तक वो सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं.

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