जब लोगों को लगना शुरु हो गया था कि Maarten Van Der Weijden बहुत लंबी रेस के घोड़े हैं. तभी मात्र 19 साल की उम्र में नीदरलैंड के इस युवा तैराक को कैंसर हो गया. डॉक्टरों के अनुसार उनकी बच पाने की उम्मीद बेहद कम थी, Leukemia इस खिलाड़ी की जान ले लेता. शायद डॉक्टर को ये नहीं पता था कि एक खिलाड़ी सिर्फ़ प्रतिभा से बड़ा नहीं बनता उसका जज़्बा उसे औरों से अलग बनाता है. मात्र दो साल बाद Maarten Van Der Weijden स्विमिंग ट्रैक पर वापसी कर चुके थे और उसके सात साल बाद उन्होंने 2008 बीजिंग ऑलंपिक में गोल्ड मेडल भी जीता.

कुछ दिनों पहले कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए और रिसर्च के लिए फ़ंड जुटाने के लिए Maarten Van Der Weijden ने 200 किलोमीटर तैराकी करने की ठानी वो भी मात्र तीन दिन के भीतर.

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हालांकि, इस दौरान कुछ हॉल्ट लिए जाने थे, फिर भी ये बेहद कठिन कार्य था. नीदरलैंड का ये ऑलंपिक गोल्ड मैडलिस्ट तय लक्ष्य तक तो नहीं पहुंच सका, लेकिन उसने 55 घंटे के भीतर 163 की रास्ता तय कर लिया था.

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प्रदूषित पानी की वजह से उनकी तबीयत बीच में ही ख़राब होने लगी थी. एक असफ़ल प्रयास के बावजूद तैराकी का मक़सद पूरा हुआ. इस आयोजन से कुल 4 मिलियन डॉलर फ़ंड इकट्ठा किया गया.

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55 घंटे की तैराकी से Maarten Van Der Weijden की शरीर की क्या हालत हो गई, ये शब्दों से ज़्यादा उनकी ये तस्वीरें बयां कर रही हैं.

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सोशल मीडिया पर भी Maarten Van Der Weijden की इस नेक काम के लिए बहुत तारीफ़ हो रही है.

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