आजकल देश में Organic Food यानी जैविक खेती की चर्चा हो रही है. लोगों का मानना है कि इसके प्रयोग से शरीर स्वस्थ और तंदरुस्त रहता है. लेकिन सबसे अहम सवाल है कि जिस देश में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हैं, वहां जैविक खेती कैसे संभव हो सकती है? इन सबके अलावा पूरे विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या है. जनसंख्या के बढ़ने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, जैविक खेती के इस्तेमाल से सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है. सबसे अहम बात है कि जैविक खेती से किसानों को उसका मेहनताना भी मिल सकता है.

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देखा जाए, तो भारतीय किसान रासायनिक खाद, ज़हरीले कीटनाशकों की मदद से खेती करते थे, जो इंसानों के स्वास्थ्य और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है. इसके अलावा वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है. इन सभी समस्याओं को रोकने के लिए किसान रासायनिक तरीकों की जगह कृषि के जैविक तरीकों का उपयोग करें, तो बहुत हद तक इन समस्याओं से निपटा जा सकता है.

आख़िर जैविक खेती क्या बला है?

इसे परंपरागत खेती भी कहा जाता है. दूसरे शब्दों में खेती की वह विधी जिसमें रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बिना या कम प्रयोग से फसलों का उत्पादन किया जाता है, जैविक खेती कहलाती है. इसका अहम उद्देश्य मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनाए रखने के साथ-साथ फसलों का उत्पादन बढ़ाना है.

क्यों ज़रुरी है जैविक खेती?

जैविक खेती का मुख्य उद्देश्य यही है कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को नष्ट होने से बचाया जाए और खाने की चीजों जिनका उपयोग हम रोज़ करते हैं, उनमें रासायनिक चीजों के इस्तेमाल को रोका जाए. फसलों को ऐसे पोषक तत्व उपलब्ध कराना, जो कि मृदा और फसलों में अघुलनशील हो और सूक्ष्म जीवों पर असरदायक हो. जैविक खेती का मुख्य उद्देश्य इसके वातावरण पर प्रभाव को सुरक्षित करना साथ ही साथ जंगली जानवरों की सुरक्षा और प्राकृतिक जीवन को सुरक्षित करना है.

जैविक खेती से पैसे कमाएं

आज पूरी दुनिया में जैविक चीज़ों की मांग है. लोग जैविक खेती से प्राप्त फसलों को खरीदना चाहते हैं. ऐसे में यह देश के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. हम आपको कुछ उदाहरणों द्वारा बताना चाहते हैं कि इसकी खेती करने वाले किसान काफ़ी ख़ुशहाल हैं.

केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती के जरिये तैयार किए गए खाद्य पदार्थ न केवल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, बल्कि इनकी वजह से प्राकृतिक संतुलन भी ठीक रहता है. यही वजह है कि सरकार का ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर है.

ऑर्गेनिक खेती समय की मांग है. इसकी मदद से किसान सशक्त होंगे. सरकार और सामाजिक संस्था को इस पर ध्यान देने की ज़रुरत है.