हमारे देश ने विदेशों में बहुत कुछ निर्यात किया है. 100 सालों से योग और बासमती चावल के अलावा भी ऐसा बहुत कुछ है, जो हमने बाहर भेजा है. पर हमने जो विश्व को एक खास योगदान दिया है, वो इन सबसे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है. हम बात कर रहे हैं ‘पटियाला पेग’ की.

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दशकों से ये चर्चा चली आ रही है कि क्या पटियाला पेग बस भारतीयों द्वारा पीने की क्षमता मापने की एक इकाई है? पर असल में बात ये है कि ये एक मापक इकाई से बढ़कर बहुत कुछ है. दरअसल ये मर्दानगी साबित करने का और बेवजह की बहस में शरीक होने का एक ज़रिया है. यह ‘Sardar Risky After Whiskey’ जैसे फ़िज़ूल मुहावरों का पर्याय बन कर रह गया है. पटियाला पेग, गिलास को गले तक Whiskey से लबालब कर देने की कहानी है, ताकि किसी को कम पी पाने का मलाल ना रहे. पटियाला पेग का मतलब ही है कि पेग ऐसा बनाओ जिससे शराब आंखों तक चढ़ जाए.

जानकारी के लिए बता दें कि पटियाला राजपुरा से 24 किलोमीटर दूर एक छोटा सा शहर है. वास्तव में पटियाला पेग का इस शहर से कोई वास्ता नहीं है. ये शहर बस पटियाला जूती और पटियाला सलवार के लिए मशहूर है. वैसे पटियाला पेग का इतिहास बहुत ही Glorious रहा है. आप अंग्रेजी चाय पीते हुए इसके बारे में अगर चर्चा कर रहे हैं तो इसका कोई फायदा नहीं है.

इसके बारे में एक कहानी है, जिस पर लगभग सभी सहमत हैं. वो है महाराजा भूपिंदर सिंह की कहानी. महाराजा भूपिंदर सिंह 1891 से लेकर 1938 तक पटियाला के राजा थे. उनकी Rolls Royce को शहर में कचरा ढ़ोने वाली गाड़ी की तरह इस्तेमाल करवाने का किस्सा आपने ज़रूर सुना होगा. महाराजा को पार्टियों का अत्यंत शौक था, और पटियाला पेग इन्ही पार्टियों की खोज थी. पर महाराजा की कौन से पार्टी में इसका जन्म हुआ, इसपर अभी भी चर्चा जारी है.

ये भी माना जाता है कि भूपिंदर सिंह की एक खास पोलो टीम थी, जिसमें 8 सिख योद्धा थे. एक बार उन्होंने Irish टीम को एक नया गेम ‘Tent-Pegging’ खेलने का निमंत्रण दिया. जब खेल से पहले शराब का प्रस्ताव रखा गया, तो Irish टीम ने अपनी क्षमता दिखाने के लिए ज्यादा पीना शुरू कर दिया. ज्यादा पी लेने की वजह से वो हार गए, उन्होंने कहा की पेग बड़े बनाए गए थे, तब राजा ने कहा “Yes, In Patiala our pegs are large!”, तब से कहा जाता है कि पटियाला पेग झेलना सबके बस की बात नहीं है.

पटियाला पेग में शराब की मात्रा कितनी होती है?

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पहले कहा जाता था कि पटियाला पेग, सामान्य पेग से दो उंगली ज्यादा उंचा रहता है. कुछ लोगों का ये भी मानना है कि पटियाला पेग वो होता है, जिसमें गिलास आधा शराब और आधा पानी से भरा हुआ हो. हालांकि पीने के शौक़ीन कुछ बुज़ुर्ग ये कहते हैं कि पटियाला पेग में शराब की मात्रा 120 ml. होनी चाहिए, पर Pub और Bars 90 ml. ही सर्व करते हैं.

पटियाला पेग को विश्व भर में प्रसिद्धि क्यों नहीं मिली?

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अगर आप भारत से बाहर किसी अन्य देश के Pub में जाकर पटियाला पेग की मांग करें, तो उनका जवाब होगा- Huh! या What!. पटियाला पेग के विश्व भर में ना पहुंच पाने की वजह ये रही कि योग की तरह इसे किसी Celebrity ने Endorse नहीं किया.

अगर पटियाला पेग पीकर आप ये सोचते हैं कि आप अपनी परम्परा को बचा रहे हैं तो ऐसा कुछ नही है. शराब चाहे छोटे पेग में हो या पटियाला पेग में, हर हाल में नुकसान ही पहुंचाएगी.

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