हिंदी सिनेमा की सबसे क्लासिक फ़िल्मों में से एक, 'पाकीज़ा' में काम कर चुकी पूर्व अभिनेत्री गीता कपूर को उनके अपने ही बच्चों ने बेसहारा छोड़ दिया है. गीता को अस्पताल में भर्ती करवाकर उनके बच्चे उन्हें किस्मत के भरोसे छोड़ गए. गीता 1 महीने से अस्पताल में भर्ती थीं और उनके अस्पताल का बिल, 1.5 लाख से अधिक हो गया था. पर उनके बेटे, राजा कपूर का कोई पता नहीं था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गीता के बेटे न तो अपने घर पर मौजूद हैं और न ही किसी का फ़ोन रीसिव कर रहे हैं. अस्पताल प्रशासन गीता के लिए वृद्धाश्रम ढूंढ रहा है.

गीता कपूर ने बताया,

'मेरा बेटा मुझ पर हाथ उठाता था. मुझे 4 दिनों में एक बार खाना मिलता था और कई बार मुझे कमरे में बंद भी कर दिया जाता था. मैं वृद्धाश्रम में रहने के लिए तैयार नहीं थी, इसीलिए ये पूरा खेल रचा गया. उसने मुझे भूखा रखा ताकि मैं बीमार हो जाऊं. उसके बाद उसने मुझे एडमिट करवा दिया और मुझे छोड़कर भाग गया.'
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गीता के परिवार के दोस्तों ने राजा से वापस लौट आने की दरख़्वास्त की है.

CBFC के सदस्य, अशोक पंडित और फ़िल्मकार रमेश तौरानी ने गीता के अस्पताल बिल भरे हैं.

Indian Express से बातचीत में अशोक ने बताया,

'मुझे गीता जी के बारे में अखबारों से पता चला. मुझे ये नहीं पता था कि ये पाकीज़ा की ही गीता कपूर हैं. जैसे ही मुझे पता चला, मैं अस्पताल पहुंचा और बिल का भुगतान किया. मुझे उनमें अपनी ही मां नज़र आई. पता नहीं उनके बेटे ने ऐसा क्यों किया.'

गीता कपूर ने 100 से भी ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है. कमाल अमरोही की 'पाकीज़ा' में उन्होंने राजकुमार की दूसरी बीवी का किरदार निभाया था.

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गीता का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया,

'राजा, गीता को एडमिट करवाने के लिए लाया और उसने ख़ुद को एक आर्मी ऑफ़िसर बताया. उसे पैसे देने और Formalities पूरी करने के लिए कहा गया. ATM से पैसे निकालने के बहाने से वो अस्पताल से बाहर गया और वापस नहीं आया.'

जब मां-बाप बूढ़ें हो जाते हैं, तो बच्चे उन्हें बोझ समझकर फेंक देते हैं. पर किसी मशहूर अभिनेत्री के साथ भी ऐसा हो सकता है, ये हैरानी की बात है. 

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