पाकिस्तान की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है. यहां सिंध क्षेत्र से पहली बार एक हिन्दू दलित महिला को Senator चुना गया है. सिंध क्षेत्र एक मुस्लिम बहुल इलाका है.

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पाकिस्तान पिपल्स पार्टी(पीपीपी) की कृष्णा कुमारी कोहली सिंध क्षेत्र से Minority सीट पर Senator चुनी गई हैं. ये पार्टी बिलावल भुट्टो ज़रदारी की पार्टी है.

कृष्णा कुमारी की जीत न सिर्फ़ महिलाओं के साथ-साथ अल्पसंख्यको के लिए भी एक बहुत बड़ी जीत है. सिंध क्षेत्र के नागरपारकर ज़िले की रहने वालीं हैं कृष्णा. एक ग़रीब घर में फरवरी 1979 में जन्मी कृष्णा और उनके परिवार ने ज़िन्दगी के 3 साल एक प्राइवेट जेल में बिताये थे. जब उन्हें हिरासत में लिया गया, तब कृष्णा तीसरी कक्षा में पढ़ती थी.

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जब वो मात्र 16 साल की थीं तब उनकी शादी कर दी गई, पर कृष्णा ने पढ़ाई नहीं छोड़ी. 2013 में समाजशास्त्र में मास्टर्स किया.

अपने भाई के साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पीपीपी से जुड़ी कृष्णा आज Senator पद पर जा पहुंची हैं. उन्होंने थार और आस-पास के इलाके में पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए बहुत कुछ किया है.

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राजनीति से कृष्णा का पुराना रिश्ता है. वो रूपलो कोहली की वंशज हैं. 1857 में रूपलो ने सिंध के नागरपारकर क्षेत्र से अंग्रेज़ों के खिलाफ़ जंग छेड़ी थी, जिस कारण उन्हें अंग्रेज़ों ने फांसी दी थी.

रत्ना भगवानदास चावला, पीपीपी द्वारा चुनी गईं पहली हिन्दू Senator हैं.

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पीएमएल-एन(पाकिस्तान मुस्लिम लीग) ने Senate में 15 सीटे जीतीं और अब ये पाकिस्तानी संसद की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है.

हमारी तरफ़ से कृष्णा को शुभकामनायें.

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